लखीमपुर खीरी। जंगल में बाघों के आगे नहीं टिक पा रहे तेंदुए आबादी की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों से तेंदुओं के इंसानों पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं।
अब तक जिले में आबादी की ओर रुख कर रहे बाघ बड़ा खतरा बने हुए थे, अब तेंदुओं के हमलों की बढ़ती घटनाओं ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
पिछले करीब छह माह से तेंदुओं का आतंक ज्यादा बढ़ गया है। बीते वर्ष अगस्त माह से लेकर फरवरी 2025 में अब तक जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में तेंदुओं के हमले में चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। आबादी क्षेत्रों में पालतू पशुओं पर तेंदुओं के हमले की घटनाएं भी खूब हो रही हैं। पिछले छह माह में ही 20 से ज्यादा ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। इसके अलावा आबादी क्षेत्रों में तेंदुओं की चहलकदमी की घटनाएं भी बराबर हो रही हैं।
तेंदुओं की आबादी क्षेत्र में बढ़ रही चहलकदमी और हमलों की घटनाओं के पीछे जंगल में बाघों की संख्या बढ़ने को कारण बताया जा रहा है। दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिश्वाल का कहना है कि तराई के जंगलों में बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है। ऐसा नहीं है कि पहले तेंदुए यहां नहीं थे, पर अब जंगलों में बाघों की आबादी बढ़ने से तेंदुए जंगल से बार का रुख कर रहे हैं। इसी कारण इंसानों पर उनके हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। संवाद