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दुधवा में गैंडों के परिवार में होगा बंटवारा

Sun, 07 May 2017 11:32 PM IST
अशोक निगम लखीमपुर खीरी।
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दुधवा - फोटो : अमर उजाला
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आनुवंशिक प्रदूषण से बचाने को दुधवा गैंडा पुनर्वास योजना फेज-2 का रास्ता साफ  
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दक्षिण अफ्रीका से दवा मंगाने को मिली अनुमति    
नवंबर-दिसंबर में नए घर में होगा गैंडों का गृह प्रवेश       
नेपाल और असम से भी मंगाए जाएंगे कुछ और गैंडे      
दुधवा नेशनल पार्क  में आबाद 34 गैंडों के परिवार में जल्दी ही बंटवारा होने वाला है। परिवार के कुछ सदस्यों के लिए नया घर बेलरायां रेंज के छंगा नाला में बनकर तैयार हो गया है। अनुकूल मौसम का इंतजार है। जल्द ही इन्हें शिफ्ट कर दिया जाएगा। यहां मौजूद गैंडों में आनुवंशिक दोष दूर करने को ऐसा किया जा रहा है।   
दुधवा नेशनल पार्क में पिछले 33 वर्षों से आबाद गैंडा परिवार के लिए गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 की तैयारी पिछले तीन साल से चल रही है, जो जल्द ही पूरी हो जाएगी। गैंडों को नए घर में लाने के लिए बेहोशी की जिस दवा की जरूरत होती है, वह दक्षिण अफ्रीका से मंगाई जानी है। इसके आयात की अनुमति केंद्र सरकार के कृषि एवं पशुपालन मंत्रालय से मिल गई है। भारत में प्रतिबंधित एट्रोफिन एम-99 और ईमोबिओलिआन दवा मंगाने के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल आफ इंडिया से एनओसी मिलनी अभी बाकी है। यहां से एनओसी मिलते ही दवा मंगाई जाएगी। इससे पहले डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के गैंडा विशेषज्ञों को असम से बुलाकर जरूरी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। नए घर में शिफ्ट करने के लिए नर और मादा गैंडों को चिह्नित किया जा चुका है।        
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1312 हेक्टेयर में होगा नया घर       
गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 के लिए दुधवा नेशनल पार्क के बेलरायां रेंज में छंगा नाला क्षेत्र के 1312 हेक्टेयर एरिया को आरक्षित कर उसको सौर ऊर्जा चलित तारों से घेर का बाड़ा, केबिन और रैंप बनाया जा चुका है। इस क्षेत्र में गैंडों के जलविहार के लिए 162 हेक्टेयर का वेटलैंड और घास का बड़ा मैदान हैं, जहां प्राकृतिक रूप से घास की 14 प्रजातियां बहुतायत में मिलती हैं, जिन्हें गैंडे बड़े चाव से खाते हैं। गैंडों को ककरहा से यहां लाने के लिए पिंजड़ा, क्रेन आदि तैयार है।         
 
84 में पांच सदस्यों को बसाया गया था
पहले चरण में असम से दो नर और तीन मादा गैंडों को लाकर दुधवा के 33 वर्ग किलोमीटर एरिया में फैले ककरहा के सुरक्षित मैदान में रखा गया। इसके एक साल बाद नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से लाकर चार और मादा गैंडों को इस परिवार में शामिल किया गया। अब गैंडों के इस कुनबे की आबादी बढ़कर 34 हो गई है।       
   
तो इसलिए जरूरी है दूसरा घर
 गैंडों की तीन पीढ़ियों में अधिकांश सदस्य एक या दो नर गैंडों की संतानें हैं। ऐसे में उनमें आनुवंशिक दोष पैदा हो रहा है। नए घर में दुधवा में पहले से मौजूद दो नर और तीन मादा गैंडों को रखा जाना है। बाद में असम और नेपाल से लाकर कुछ और गैंडे इस घर में रखे जाएंगे। वन्यजीव विशेषज्ञ और राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ. वीपी सिंह बताते हैं कि गैंडे प्राय: एक साथ रहना पसंद करते हैं लेकिन नर गैंडा दूसरे नर गैंडे को पसंद नहीं करता। नर गैंडा या तो मादा गैंडों के साथ या बच्चों के साथ रहता है। ऐसा न होने पर इनमें संघर्ष होता है।       
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दुधवा में आबाद गैंडा परिवार को आनुवंशिक प्रदूषण से बचाने के लिए छंगानाला में गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-2 शुरू की जा रही है। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दक्षिण अफ्रीका से दवा आयात करने की अनुमति मिल गई है। नवंबर या दिसंबर महीने में चिह्नित गैंडों को नए घर में शिफ्ट कर दिया जाएगा।       
सुनील चौधरी, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व      
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