पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क के नवीन सत्र का आगाज 15 नवंबर से होगा। कोरोना संक्रमण को लेकर सत्र के सफल क्रियान्वयन को लेकर तमाम दुश्वारियां नजर आ रहीं हैं। बावजूद इसके पार्क प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। गाइडलाइन तैयार की जा रही है जो जल्दी जारी होगी। जिसके तहत कोरोना को लेकर पूरी सतर्कता बरतते हुए सैलानियों को दुधवा का भ्रमण कराया जाएगा।
दुधवा नेशनल पार्क की विशेषताओं पर नजर डाली जाए तो यहां के अलौकिक वातावरण के साथ ही यहां पर पाए जाने वाले वन्य जीव और पक्षी सैलानियों को बेहद आकर्षित करते हैं। दुधवा में बाघ, गैंडा, हाथी, हिरन, मगरमच्छ, सरीसृप के अलावा कई वन्य जीव हैं। यहां पर 75 प्रजातियों के वृक्ष और 21 प्रकार की झाड़ियां, 17 प्रकार की बेल और लताओं के अलावा बंगाल फ्लोरिकन, फिसिंग ईगल, लेस फ्लोरिकन, ग्रेट इंडियन हर्नबिल, इंडियन पाइड हार्न बिल, लैगर फैल्कान, पीफाउल, स्पड विल्ड डक समेत पक्षियों की करीब 450 प्रजातियां हैं। दुधवा में स्तनपायी की जहां 14 प्रजातियां हैं तो सरीसृप की भी 10 प्रजातियां हैं।
ऐसे पहुंचे दुधवा नेशनल पार्क
दुधवा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए सड़क यातायात से ही पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से आने वाले सैलानी बरेली, पीलीभीत, मैलानी होते हुए पलिया और यहां से दुधवा जा सकते हैं। दिल्ली से पलिया तक कई रोडवेज और प्राइवेट बसें चलती हैं जो सैलानियों के लिए यहां आने में मददगार बनती हैं। लखनऊ से भी निजी और यात्री वाहनों से दुधवा पहुंचा जा सकता है। इसके लिए लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर, पलिया होते हुए दुधवा तक सैलानी जा सकते हैं। इसके अलावा लखनऊ से बड़ी रेल लाइन की ट्रेन से लखीमपुर आकर फिर सड़क यातायात से दुधवा पहुंचा जा सकता है।
ठहरने की सुविधा
दुधवा नेशनल पार्क पर्यटन परिसर में वन विश्राम भवन के साथ ही 14 थारू हट व जनरल हाल है। थारूहट दुधवा, वन विश्राम भवन बनकटी, किशनपुर, सोनारीपुर, बेलरायां, सलूकापुर में भी ठहरने की सुविधाएं हैं।
पार्क को खोलने को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए जल्द ही सतर्कता को लेकर गाइडलाइन तैयार कर जारी की जाएगी ताकि पार्क खुलने के बाद आने वाले सैलानियों को उसका पालन कराकर वन्य जीवों का दीदार कराया जा सके।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
दुधवा में हाथी पर बैठकर गैंडा देखते सैलानी। (फाइल फोटो)- फोटो : LAKHIMPUR