पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) के 2025-26 पर्यटन सत्र का अंतिम रोमांच मंगलवार को बारिश में बह गया। सत्र के आखिरी दिन पर्यटकों को सफारी कराने के लिए ली गई विशेष अनुमति भी काम नहीं आई और भारी बारिश के चलते सफारी नहीं हो सकी। इसके साथ ही बिना किसी चहल-पहल के पर्यटन सत्र का समापन हो गया।
डीटीआर में साप्ताहिक बंदी के तहत प्रत्येक मंगलवार को सफारी बंद रहती है। इस बार पर्यटन सत्र का आखिरी दिन मंगलवार को पड़ने से दूर-दराज से आए पर्यटकों के उत्साह को देखते हुए पार्क प्रशासन ने विशेष अनुमति लेकर मंगलवार को भी पार्क खोलने का फैसला किया था।
सैलानियों ने आखिरी दिन का रोमांच समेटने के लिए एडवांस बुकिंग करा रखी थी। तड़के ही पर्यटक दुधवा बेस कैंप पर जुटने लगे थे, लेकिन सुबह होते ही मौसम ने करवट बदल ली। आसमान में काले बादलों ने डेरा जमा लिया और झमाझम बारिश शुरू हो गई।
देखते ही देखते जंगल के कच्चे रास्ते और सफारी ट्रैक पानी व कीचड़ से लबालब हो गए। भारी बारिश और खराब रास्तों को देखते हुए पार्क प्रशासन ने पर्यटकों की सुरक्षा के मद्देनजर सफारी रोकने का फैसला लिया। दूर-दराज से आए पर्यटक बिना जंगल घूमे ही वापस लौट गए। इस बारिश के साथ ही दुधवा का यह पर्यटन सत्र अगले सत्र तक थम गया। वर्तमान पर्यटन सत्र की शुरुआत एक नवंबर 2025 को हुई थी। अब अगला पर्यटन सत्र नवंबर 2026 में शुरू होगा।
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बाघों की दहाड़ ने दिलाई नई पहचान
पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) का पर्यटन सत्र 2025-26 बाघों की दहाड़ के दम पर नई पहचान बनाकर विदा हुआ। इस सत्र में बाघों के शानदार दीदार ने जहां देश-विदेश से रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों को आकर्षित किया, वहीं डीटीआर ने पर्यटक संख्या, राजस्व, जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए। सोशल मीडिया पर बाघों की तस्वीरों और वीडियो ने भी डीटीआर की ब्रांड वैल्यू को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
नवंबर 2025 से जून 2026 तक चले इस पर्यटन सत्र में 75,615 भारतीय और 796 विदेशी पर्यटक दुधवा पहुंचे। पिछले सत्र में 57,409 भारतीय और 644 विदेशी पर्यटक आए थे, जबकि वर्ष 2023-24 में 50,961 भारतीय और 234 विदेशी सैलानियों ने भ्रमण किया था।
पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा असर राजस्व पर भी पड़ा। वर्ष 2023-24 में डीटीआर को 1,39,73,240 रुपये, वर्ष 2024-25 में 1,86,90,000 रुपये और इस सत्र में रिकॉर्ड 2,96,63,324 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2022-23 में 28,233 भारतीय व 114 विदेशी सैलानी दुधवा के भ्रमण पर आए थे। इसमें 1,45,16,127 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
पूरे सत्र में बाघ पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र रहे। जंगल सफारी के दौरान सैलानियों ने बाघों को प्राकृतिक आवास में बेहद करीब से देखा। चिलचिलाती धूप में वाटर होल में अठखेलियां करते बाघ, जिप्सियों के आगे-आगे शान से चलते बाघ और शावकों के साथ पर्यटन मार्ग पर बैठी बाघिन के नजारे पर्यटकों के लिए सबसे यादगार रहे। वायरल तस्वीरों, वीडियो और पर्यटकों के अनुभवों के आधार पर अनौपचारिक अनुमान है कि इस सत्र में बाघों के दिखने की घटनाएं 400 से 500 के बीच रहीं, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक संख्या उपलब्ध नहीं है। संवाद
मिलीं अत्यंत दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियां
यह सत्र जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से भी उपलब्धियों भरा रहा। साइबेरिया से आने वाला आईयूसीएन की अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में शामिल येलो ब्रेस्टेड बंटिंग पक्षी दर्ज किया गया। कैलोट्रोपिस आकिया (मदार) नामक पौधा पहली बार दुधवा में रिकॉर्ड किया गया। कामन ब्रांजबैक ट्री स्नेक और ट्विन-स्पॉटेड वोल्फ स्नेक जैसे दुर्लभ सर्पों की मौजूदगी भी दर्ज की गई, जिन्हें स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत माना जाता है।
गैंडा संरक्षण में मिली बड़ी कामयाबी
गैंडा संरक्षण के क्षेत्र में भी डीटीआर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। गैंडा पुनर्वास परियोजना के तहत छह गैंडों को परियोजना क्षेत्र से निकालकर खुले जंगल में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ा गया। पार्क प्रशासन के अनुसार, यह कदम पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और गैंडों की आबादी को प्राकृतिक वातावरण देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
दुर्लभ ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक। फाइल फोटो