लखीमपुर खीरी। कोरोना का नाम सुनते ही एक अजीब सा खौफ मन में उठता है। बावजूद इसके पिछले करीब डेढ़ सालों से चिकित्सक संक्रमितों का दिन-रात इलाज करते आ रहे हैं। इस दौरान शायद ही ऐसा कोई डॉक्टर बचा हो जो संक्रमित न हुआ हो। फिर भी डॉक्टर कोरोना को हराने में एक योद्घा की तरह मैदान में डटे हैं। कोरोना से लोगों की जान बचाने के लिए निजी व सरकारी अस्पताल के चिकित्सक फ्रंट लाइन में ड्यूटी दे रहे हैं। कोविड काल ने इनकी जीवनशैली तक बदल दी। कोरोना के कारण किसी ने अपने परिवार से दूरी बना ली तो कोई सगे संबंधियों के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सका। इन तमाम समस्याओं के बावजूद धरती के भगवान यानी डॉक्टर ड्यूटी धर्म का पालन करते हुए पिछले डेढ़ साल से संक्रमितों की सेवा कर उनकी जान बचाने से पीछे नहीं हटे।
संक्रमित होने के बावजूद फोन से निभाई जिम्मेदारी
कोरोना की दूसरी लहर के रफ्तार पकड़ते ही हर तरफ हाहाकार मच गया। जिला अस्पताल में भर्ती होने से लेकर ऑक्सीजन व बेड तक के लिये मारामारी मची थी। मरीजों को चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के दौरान सीएमएस डॉ. आरसी अग्रवाल संक्रमित हो गए। मरीजों के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर से लेकर दवाओं आदि की उपलब्धता के लिए होम क्वारंटीन के दौरान फोन से व्यवस्था दुरुस्त कराते रहे, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराकर उनकी जान बचाई जा सके। संक्रमण की चपेट से निकलने के बाद फिर से अपनी चिंता किए बिना मरीजों की सेवा करने में जुट गए।
अपनी परवाह किए बिना मरीजों की करते रहे सेवा
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया पिछले साल से कोरोना की जंग में फ्रंट लाइन में खड़े हैं। पहली से लेकर दूसरी लहर में भी मरीजों की सेवा में दिन रात लगे रहे। अस्पताल के अधिकतर डॉक्टरों के संक्रमित होने के बाद मेडिकल पुरुष एवं महिला से लेकर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज करते रहे। टेली मेडिसन में समय मिलने पर मरीजों को फोन पर उपचार के लिए दवाएं लिखते रहे। काम का बोझ बढने के दौरान मेडिकल वार्ड में चक्कर आने से गिर तक पड़े। होश आने पर फिर से मरीजों की सेवा जुट में लग गए।
ओपीडी बंद होने पर फ्लू वार्ड में करते रहे मरीजों की सेवा
संक्रमण की रोकथाम के लिए जिला अस्पताल में ओपीडी बंद हो गई। मगर, दूसरे राज्यों और जनपदों से आने वालों की लक्षण के आधार पर उपचार व जांच के लिए जिला अस्पताल में फ्लू वार्ड बनाया गया। जहां पर आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विजय प्रकाश वर्मा ड्यूटी करते रहे। इस दौरान संक्रमण की चपेट में आकर घर परिवार से दूरी बना ली। स्वस्थ होने के बाद फिर से मरीजों की सेवा करने के लिए फ्लू वार्ड में जिम्मेदारी निभाने लगे।
भाभी के अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके
कोरोना काल शुरू होने पर एसीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार को संक्रमितों के कांट्रेक्ट ट्रेसिंग की जिम्मेदारी मिली, जिसका दूसरी लहर में भी वह निर्वहन करते रहे। अप्रैल के अंत में कोरोना की रफ्तार काफी तेज थी। संक्रमितों की बढ़ती संख्या से हर तरफ हाहाकार मचा था। इस बीच इनकी 59 वर्षीय भाभी की 21 अप्रैल की रात एक बजे मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद भी ड्यूटी धर्म का पालन करते हुए भाभी के अंतिम दर्शन के लिए लखनऊ तक नहीं जा सके। डॉ. अश्वनी कुमार बताते हैं कि उस दौरान संक्रमित काफी तेज गति से मिल रहे थे। इसलिए भाभी के अंतिम दर्शन कर कांधा देने तक नहीं जा सके।
घर पर नि:शुल्क करते रहे मरीजों का इलाज
मोहम्मदी सीएचसी में संविदा पर तैनात डॉ. धर्मेंद्र वर्मा ड्यूटी धर्म का निर्वहन करते हुए संक्रमित हुए। होम क्वारंटीन में कोरोना को मात देकर फिर से ड्यूटी पर आकर मरीजों की सेवा करने लगे। राहगीरों की जांच के लिए बरबर चौराहा से लेकर सीएचसी गेट पर कोविड टेस्ट करते हैं। डॉ. धर्मेंद्र वर्मा बिना छुट्टी लिए घर से लेकर अस्पताल में मरीजों का उपचार करते रहे। डॉ. धर्मेंद्र वर्मा बताते हैं कि घर में बुजुर्ग पिता, पत्नी व बच्चें हैं। महामारी में घर पर आने वाले मरीजों का निशुल्क इलाज कर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे।
मरीजों की सेवा करने में चली गई जान
गोला के मिल डाइवर्जन निवासी डॉ. विनोद कुमार वर्मा का खुटार रोड पर क्लीनिक है। कोरोना महामारी में सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद गई। उधर, अधिकतर निजी चिकित्सकों ने भी मरीज देखने बंद कर दिए। ऐसे में डॉ. विनोद कुमार वर्मा मरीजों का सहारा बन उनका इलाज करते रहे। इस दौरान वायरस की चपेट में आकर संक्रमित हो गए। काफी दिन तक हलाज चला। मगर, अंतत: कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए।
मरीजों के लिए रात एक बजे तक करते रहे ओपीडी
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर की आक्रमता को देखते हुए कर्फ्यू लग गया। इस दारौन सरकारी अस्पताल से लेकर तमाम निजी अस्पतालों में भी ताले पड़ गए। संक्रमण से बचने के लिए डॉक्टरों ने मरीजों को देखना बंद कर दिया। ऐसे में राजापुर स्थित हाईवे हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर के डॉ. अनिल कुमार वर्मा मरीजों का सहारा बने। इलाज के लिए लोगों को परेशान न होना पड़े इसलिए रात के दो-दो बजे तक ओपीडी कर मरीजों की सेवा करते रहे। डॉ. अनिल कुमार वर्मा बताते हैं कि मरीजों की सेवा करना हमारा ड्यूटी धर्म है।