वन भूमि और सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर गन्ना बोने वाले किसान इस बार हाथ मलते रह जाएंगे। गन्ना सर्वेक्षण कार्यक्रम की समीक्षा में डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा है कि वन भूमि और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बोए गए गन्ने का सर्वे नहीं कराया जाएगा। इसे रोकने के लिए वन विभाग अतिक्रमित भूमि के गांवों की सूची और गाटा संख्या गन्ना विभाग को उपलब्ध करा दें। डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मानसून आने से पहले सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को सर्वेक्षण कार्यक्रम का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्ट्रेट सभागार में आगामी पेराई सत्र 2018-19 के लिए कराए जा रहे गन्ना सर्वेक्षण कार्यक्रम को समय से कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार गन्ना आयुक्त ने डीएम को सर्वेक्षण कार्यक्रम पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, जिसके क्रम में सर्वे नीति का अनुपालन कराने के लिए राजस्व, वन विभाग, गन्ना विभाग और चीनी मिलों के अधिकारियों की बैठक हुई। डीएम शैलेंद्र सिंह ने कहा कि सर्वे जीपीएस प्रणाली से कराया जाए। सर्वे से पूर्व किसानों को एसएमएस से जानकारी दी जाए। सर्वे के दौरान खेत पर ही किसानों को सर्वे स्लिप जरूर दें। गन्ना विभाग और चीनी मिल अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बिना घोषणा पत्र भराए किसानों का सट्टा संचालित नहीं किया जाएगा। सर्वे और सट्टा में पारर्दिशता लाने के लिए चीनी मिलों के अधिकारियों को राजस्व विभाग से भू राजस्व अभिलेख सीडी में और नक्सा की फोटोकॉपी प्राप्त कर गन्ना विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चार मिलों ने शुरू नहीं किया सर्वे
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि गोविंद शुगर मिल ऐरा, अजवापुर, कुंभी और गुलरिया मिल ने अभी तक सर्वे कार्य प्रारंभ नहीं किया है। इस पर डीएम ने संबंधित मिलों के अधिकारियों की क्लास लगाई और तत्काल सर्वे कार्य प्रारंभ करते हुए समय से पूर्ण कराने के निर्देश दिए हैं।
बाधा डालने वाले दबंगों पर होगी कार्रवाई
समीक्षा में जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि गन्ना सर्वेक्षण के दौरान कुछ जगहों पर दबंग किस्म के अराजक तत्वों द्वारा सर्वे कार्य में बाधा उत्पन्न की जाती है। तो डीएम ने कहा कि सर्वे टीम ऐसे लोगों को चिह्निते कर संबंधित तहसीलों के एसडीएम को सूची सौंपे और थाने में एफआईआर दर्ज कराएं।