लखीमपुर खीरी। जिले के विकास को गति देने के लिए हर वर्ष होने वाली जिला योजना समिति की बैठक बृहस्पतिवार को बिना कोई योजना बनाए ही संपन्न हो गई। दो साल बाद हुई बैठक का सिर्फ समीक्षा तक सीमित रहना चर्चा का विषय बना रहा।
जिले के प्रभारी मंत्री नितिन अग्रवाल अपने निर्धारित समय से डेढ़ घंटा विलंब से करीब डेढ़ बजे कलक्ट्रेट सभागार पहुंचे। लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं का लाभ देने के साथ ही जरूरतमंदों को कंबल बांटे।
इसके बाद उन्होंने मनरेगा, प्रधानमंत्री शहरी व ग्रामीण आवास, ऑपरेशन कायाकल्प, कस्तूरबा विद्यालय की ऊंचीकरण, कृषि विभाग की विभिन्न योजनाएं, कृषि यंत्रीकरण, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, बिजली विभाग की रीवैंप योजना, जल निगम की हर घर जल योजना, स्वास्थ्य विभाग की जननी सुरक्षा योजना, राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम, टीकाकरण, आयुष्मान कार्ड, श्रम विभाग, समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग, पशु विभाग, मत्स्य आदि विभागों की योजनाओं की समीक्षा कर उनकी प्रगति जानी।
बैठक में सभी विधायकों को बुलाया गया था, लेकिन सिर्फ धौरहरा विधायक विनोद शंकर ही नजर आए। बैठक में खीरी सांसद उत्कर्ष वर्मा, धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया, डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल, सीडीओ अभिषेक कुमार आदि जिलास्तरीय अफसर मौजूद रहे।
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सरकार ने खत्म कर दी जिला योजना, बना दिया समीक्षा बैठक : धौरहरा सांसद
धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया ने जिला योजना की बैठक को औपचारिकता बताया। कहा कि सरकार ने जिला योजना को खत्म कर समीक्षा बैठक बना दिया है। जिला योजना की बैठक का उनको पहले से कोई भी एजेंडा नहीं दिया गया। ऐसी बैठक का कोई भी मतलब नहीं है, जब उसके बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं। पूर्व में मांगी गई जानकारी भी अब तक न मिलने पर सांसद ने नाराजगी जाहिर की। कहा कि 15 दिन पहले दिशा की बैठक में जल जीवन मिशन सहित अन्य कार्यों की जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई। दिशा की बैठक में छुट्टा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने को कहा था, उस पर भी कोई काम नहीं हुआ। वन्यजीवों के हमलों को रोकने के लिए कोई काम नहीं हो रहा। संवाद
300 रुपये के कंबल के लिए चार घंटे करना पड़ा इंतजार
जिला योजना समिति की बैठक के पहले प्रभारी मंत्री ने जरूरतमंदों को कंबल बांटे। सैकड़ों लोग सुबह ही कलक्ट्रेट पहुंच गए थे। पहले तो मैदान में बैठे रहे, बाद में उन्हें सभागार में बिठाया गया। प्रभारी मंत्री डेढ़ बजे कलक्ट्रेट पहुंचे। स्वागत होने के बाद करीब दो बजे उन्होंने जरूरतमंदों को कंबल बंटे। 300 रुपये का एक कंबल पाने के लिए लोगों को चार घंटों तक इंतजार करना पड़ा।
जिला योजना में पहले सभी विभागों के प्रस्ताव लिए जाते थे और उसी के आधार पर बजट जारी होता था, लेकिन अब अलग से कोई बजट नहीं आता है। विभागों को जो बजट दिया गया है, उसी की समीक्षा की जाती है।
अभिषेक कुमार, सीडीओ