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जिला अस्पताल: स्थानांतरण को लेकर सीएमएस महिला व पुरूष आमने सामने

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लि व महिला अस्पताल के सीएमएस के संग बैठक करते सीएमओ - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल बिल्डिंग के टूटने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। अंग्रेजों के जमाने के इस भवन को जल्द ही ढहाया जाएगा, क्योंकि इस जगह पर 500 बेड का अस्पताल बनेगा। हालांकि अभी तक जिला अस्पताल के स्थानांतरण की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जिम्मेदारों की मानें तो 10 मार्च को मतगणना के बाद अस्पताल भवन गिराने का काम शुरू हो जाएगा। तब तक अस्पताल शिफ्टिंग की स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
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जिले की स्वास्थ्य सेवा को बेहतर करने के लिए देवकली रोड मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण शुरू हो गया है। इसके लिए 500 बेड का भवन जिला अस्पताल परिसर में बनेगा। इसके लिए अंग्रेजों के जमाने की अस्पताल बिल्डिंग को ढहाया जाएगा। भवन को गिराने से पहले अस्पताल शिफ्ट होना है, क्योंकि नई बिल्डिंग में इतनी जगह नहीं है कि इमरजेंसी से लेकर ओपीडी हो सके। हालांकि जिला अस्पताल में मेडिकल महिला एवं पुरुष वार्ड को खाली कर अन्य वार्डों में भर्ती करा दिया है। इसके साथ स्टोर रूम को भी एक्सरे रूम के निकट स्थानांतरित किया जाने लगा है।
जिला अस्पताल शिफ्टिंग का फंसा पेंच
जिला अस्पताल प्रशासन की मंशा है कि मोतीपुर में जब 200 बेड का महिला एवं शिशु कल्याण अस्पताल बनकर तैयार है, तो महिला अस्पताल वहां शिफ्ट कर जिला अस्पताल महिला में चलाया जाए। मगर, महिला अस्पताल प्रशासन इस पर तैयार नहीं है। इनका कहना है 200 बेड के अस्पताल का भवन ही तैयार नहीं है। न तो आवास बने हैं और न ही अस्पताल तक जाने का सही सलामत रास्ता ही है। इसलिए महिला की बजाय जिला अस्पताल को भेजा जाए। हालांकि इसको लेकर दोनों अस्पताल के सीएमएस आमने-समाने हैं। इसको लेकर दोनों सीएमएस ने सीएमओ से भी मुलाकात की है।
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तीन चरणों में टूटेगा अस्पताल भवन
अस्पताल की बिल्डिंग तीन चरणों में गिराई जाएगी। पहले चरण में मेडिकल महिला एवं पुरुष वार्ड, दवा स्टॉक रूम, पैथोलॉजी, ओपीडी, सिटी स्कैन, पुराना सीएमओ कार्यालय और उसके बाद सीएमएस कार्यालय, स्टोर रूम टूटेगा। तीसरे चरण में एक्सरे रूम और सीएमएस आवास टूटेगा।
आशंकित है महिला अस्पताल का स्टाफ
महिला अस्पताल को 200 बेड के मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल में शिफ्ट किए जाने को लेकर अस्पताल स्टाफ बेहद डरा हुआ है। इसका कारण अस्पताल का हाईवे से करीब दो किलोमीटर अंदर मोतीपुर गांव में होना है। वहीं अस्पताल तक रोड का न होना और खेत खलिहान से होकर निकले टेढ़े-मेढ़े रास्ते हैं। स्टाफ बताता है कि दिन की ड्यूटी तो ठीक है। मगर, दिन में दो से रात 10 और रात 10 से सुबह छह बजे की ड्यूटी मुश्किल है। रात 10 बजे महिलाएं कैसे ड्यूटी जाएंगी और घर आएंगी। सारा स्टाफ लखीमपुर में रहता है। जहां से करीब 12 किलोमीटर ओयल और फिर वहां से करीब दो किलोमीटर गांव में स्थित अस्पताल तक जाना सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं है।
जिला अस्पताल जगसड़ स्थिति कोविड अस्पताल जाएगा या फिर मोतीपुर के 200 बेड वाले मातृ एवं शिशु कल्याण अस्पताल। इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। वार्ता चल रही है। इसका निर्णय अधिकारियों को लेना है। फिलहाल अस्पताल भवन को गिराने का काम मतगणना के बाद ही शुरू हो सकेगा। -डॉ. मदन लाल, सीएमएस, जिला अस्पताल
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