लखीमपुर-खीरी। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (आरईएस) में अवर अभियंताओं (जेई) के कार्य आवंटन में कथित भेदभाव और लंबे समय से एक ही जेई को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने का सीडीओ ने संज्ञान लिया है। उन्होंने सभी जेई को बराबर कार्य देने और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे जेई के कार्यों की जांच कराने की बात कही है।
आरईएस में मनमानी तैनाती और गड़बड़ी से संबंधित ‘किसी जेई पर लगा योजनाओं का अंबार, कोई दफ्तर तक सीमित’ शीर्षक से खबर अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। सीडीओ ने इसका संज्ञान लेकर जांच और उचित कार्रवाई की बात कही।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक, जेई प्रदीप वर्मा के पास सदर और नकहा ब्लॉक के अलावा डीआरडीए, विधायक निधि, खीरी सांसद निधि और क्रिटिकल गैप योजना का चार्ज है। इन पर अपने लोगों की फर्म बनाकर ठेकेदारी करने का भी आरोप है। जेई सुरेंद्र वर्मा के पास बेहजम ब्लॉक के अलावा तीन साल से अधिक से प्रयोगशाला का चार्ज है। तकनीकी स्वीकृति से संबंधित पासवर्ड भी उन्हीं के पास रहते हैं और तकनीकी स्वीकृति भी यही देते हैं। इसके चलते इन पर कई आरोप भी हैं। जेई मनीष गिरी के पास गोला और बांकेगंज ब्लॉक के साथ दो विधायक और एक एमएलसी निधि की जिम्मेदारी बताई जा रही है।
इसी तरह जेई पवन मौर्य को ईसानगर ब्लॉक के साथ धौरहरा सांसद निधि, जेई अजय वर्मा को फूलबेहड़, हिमांशु वर्मा को रमियाबेहड़, ब्रजेश कुमार को बिजुआ, मृदुल को पसगवां, करन सिंह को मोहम्मदी, अमित वर्मा को धौरहरा और केके रसिक को मितौली ब्लॉक की जिम्मेदारी है। पलिया और निघासन में तबादला होकर नए जेई आए हैं।
आठ माह अटैच रहे जेई मृदुल
पसगवां ब्लॉक में जेई रामभवन का गैर जनपद तबादला होने के बाद जेई मृदुल को जिम्मेदारी सौंपी गई। मृदुल आठ माह से कार्यालय में अटैच रहे। दो माह पहले ही उन्हें पसगवां भेजा गया है।
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में जिस जेई के पास कई काम हैं और जो लंबे समय से एक ही जगह तैनात हैं, उनके कार्य क्षेत्र बदलने के साथ काम कम किए जाएंगे। सभी जेई को बराबर कार्य आवंटित होंगे, ताकि गड़बड़ी की आशंका न रहे।
-अभिषेक कुमार, सीडीओ