लखीमपुर खीरी। केंद्र सरकार की तरफ से पेश किए गए आम बजट को लेकर जिले में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक ओर जहां टैक्स स्लैब में कोई राहत न मिलने, पुरानी पेंशन योजना और आठवें वेतन आयोग पर कोई घोषणा न होने से शिक्षक, कर्मचारी और व्यापारी वर्ग खासा निराश नजर है तो कैंसर और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं सस्ती किए जाने से दवा कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने राहत की सांस ली है।
शिक्षकों और कर्मचारियों को इस बजट से बड़ी उम्मीद थीं, लेकिन उनकी अपेक्षाओं पर पानी फिरता नजर आया। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन आय और सुविधाओं में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया। शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि बजट में न तो पुरानी पेंशन योजना पर कोई ठोस कदम उठाया गया और न ही आठवें वेतन आयोग को लेकर कोई संकेत दिया गया। इसके अलावा इनकम टैक्स में छूट और रिबेट को लेकर भी कोई राहत नहीं दी गई, जिससे मध्यम वर्ग खुद को ठगा महसूस कर रहा है।
वहीं दवा व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों ने कैंसर और शुगर की दवाओं को सस्ता किए जाने के निर्णय को जनहित में बताया। उनका कहना है कि इससे आम मरीजों को बड़ा लाभ मिलेगा और इलाज का बोझ कुछ हद तक कम होगा।
हम पुरानी पेंशन और आठवें वेतन आयोग को लेकर आशान्वित थे लेकिन बजट में इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई। यह बजट कर्मचारियों के लिए निराशाजनक है।
- पंकज वर्मा, शिक्षक
इलाज महंगा होता जा रहा था, ऐसे में दवाओं की कीमत घटाना सरकार का सकारात्मक कदम है। इसे जनस्वास्थ्य के हित में माना जाना चाहिए।
- अंजनी श्रीवास्तव, दवा व्यापारी
केंद्रीय बजट में सरकारी स्कूलों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने का फैसला भी अच्छा है, जिससे कंप्यूटर व टीवी के माध्यम से बच्चों को डिजिटल शिक्षा का बेहतर लाभ मिलेगा।
- संतोष मौर्या, शिक्षक
कैंसर और शुगर की दवाएं सस्ती करना एक सराहनीय फैसला है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा।
- संजय अग्रवाल, दवा व्यापारी
महंगाई के इस दौर में टैक्स स्लैब में राहत जरूरी थी। न वेतन आयोग की बात हुई, न टैक्स में छूट और न ही पुरानी पेंशन बहाली की।
- विश्वनाथ मौर्य, शिक्षक
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद
बजट पर चर्चा करते व्यापारी। संवाद