लखीमपुर खीरी। शहर का महिला अस्पताल इन दिनों बदहाली का शिकार है। इमारत की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। छत से प्लास्टर झड़ने लगा है। जगह-जगह सीलन और छतों से टपकते पानी से गर्भवती महिलाओं के लिए खतरे की आशंका बनी रहती है।
जिला महिला अस्पताल में सैकड़ों मरीज व नवजात इलाज के लिए आते हैं, लेकिन जर्जर भवन मरीजों और उनके परिजनों के लिए खतरे का कारण बन गया है। इमरजेंसी से लेकर वार्ड तक भवन की हालत काफी जर्जर हो गई है। इमारत काफी पुरानी होने की वजह से यहां बने वार्ड काफी जर्जर हालत में हैं।
बारिश के दौरान मुख्य गेट पर जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। वहीं अल्ट्रासाउंड कक्ष के सामने व इमरजेंसी के पास छत से पानी टपकने लगता है। वहीं इसके अलावा अल्ट्रासाउंड व ओपीडी में बेंच कम होने के कारण प्रसूताओं को इलाज व जांच के लिए जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
सुरक्षा के मानकों में भी फेल है जिला महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल में सैकड़ों मरीजों और तीमारदारों का आना-जाना लगा रहता है। वहीं सुरक्षा के लिहाज से भी यह अस्पताल मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। ऐसे में यदि यहां कोई अप्रिय घटना घट जाए तो ऐसे में मरीजों को निकलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि अस्पताल प्रशासन सुरक्षा के लिए फायर सिलिंडर लगवाने का दंभ भरता है, लेकिन अस्पताल से निकलने के लिए सिर्फ एक ही गेट होने से यहां खतरा बढ़ जाता है।
औसतन ओपीडी - 300-400
बेड की क्षमता - 60
अल्ट्रासाउंड - 60-70
अल्ट्रासाउंड के लिए मिली नई रेडियोलॉजिस्ट
जिला महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की कमी काफी समय से थी। जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. डीके पुष्कर को जिला महिला अस्पताल का भी चार्ज दिया गया था। हालांकि बीते करीब 20 दिन पहले रेडियोलॉजिस्ट के पद पर डॉ. दलजीत कौर को तैनात कर दिया गया। इससे प्रसूताओं को अब आराम हो गया है।
शहर में बन रहे मेडिकल कॉलेज में कुछ कार्य शेष है। जल्द ही जिला महिला अस्पताल को नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा। इससे मरीजों को दिक्कत नहीं होगी। - डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
जिला महिला अस्पताल में फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करतीं प्रसूताएं। संवाद
जिला महिला अस्पताल में फर्श पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करतीं प्रसूताएं। संवाद