के लिए ढहाए मकान-दुकान
अब तक कई लोगों को नहीं मिली मुआवजा, प्रशासन ने तहसीलदार को मौके पर भेजा
कस्बे में राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने के लिए पूर्व में अधिगृहीत की गई जमीन पर बने मकान और दुकानों को ढहाने का काम शुरू हो गया है। प्रशासन की अगुवाई में कार्यदायी कंपनी ने बुधवार को कई मकान और दुकानें गिरा दीं। हालांकि कई लोगों को अब तक मुआवजा भी नहीं मिला है, जिसकी शिकायतों पर प्रशासन ने तहसीलदार मोहम्मदी को मौके पर भेजा? तहसीलदार ने हफ्ते भर में मुआवजा देकर उनको कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं।
लखनऊ दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने के लिए प्रशासन ने कई साल पहले सङ़क के दोनों ओर तीस-तीस मीटर जमीन अधिगृहीत की थी, जिससे कस्बे के कई मकान और दुकानें लाल निशान के दायरे में आ गईं थीं। सोमवार को प्रशासन ने सभी लोगों से अपना कब्जा बुधवार तक हटाने को कहा था। प्रशासन ने इन लोगों को मुआवजा स्वीकृत किया था। मगर कस्बे की पुरानी आबादी के काफी लोगों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका, जिससे ग्रामीण परेशान थे। बुधवार को कार्रवाई शुरू करने के दौरान तहसीलदार मोहम्मदी ने यहां आकर बताया कि जिन लोगों को मुआवजा नहीं मिल सका है। उन्हें एक सप्ताह के अंदर मुआवजा दे दिया जाएगा। इसके बाद वे लोग भी अपना कब्जा खाली कर दें। इधर प्रशासन ने मुआवजा पा चुके लोगों के मकानों और दुकानों को बुधवार को ध्वस्त कर दिया। कई लोग जो कई पीढ़ियों से इन मकानों में रहते चले आए थे, वे लोग बेबस होकर आंखों के सामने अपने आशियाने उजड़ते देखकर भावुक हो गए। कब्जा खाली करने को केवल दो दिन मिलने के कारण यहां लोगों में हड़कंप मच गया। इस दौरान कुछ लोग अपना घरेलू सामान भी नहीं बचा सके। प्रशासन ने दो दिन पूर्व ही यहां घोषणा कराकर कब्जा खाली करने को कहा था। कई लोग अपनी गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंचा सके। बुधवार सुबह प्रशासन की कार्रवाई में सबसे पहले कस्बा निवासी टेलर मोहन सिंह की दुकान और पीछे बने मकान को ढहाया गया, लेकिन समय कम मिलने के कारण मोहन अपना घरेलू सामान भी वहां से नहीं ले जा सके। जिससे बुधवार को कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान मोहन सिंह का तमाम घरेलू सामान मकान के साथ मिट्टी में मिल गया। इसके अलावा उचौलिया से सटा किशनपुर ग्राम पंचायत के मजरा बबक्करपुर निवासी रामश्री पत्नी स्व मुनेंद्र कुमार अपने दो लङ़कों के साथ अमावस्या पर मढ़ियाघाट गईं थीं, लेकिन प्रशासन ने उनका मकान ढहा दिया। जिससे कमरे में रखे पांच क्विंटल गेहूं, कपड़ा बर्तन आदि घरेलू सामान भी मलबे में दब गया।