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Lakhimpur Kheri News: 30 सितंबर को भेजी डिमांड, समिति को अब तक नहीं मिल सकी डीएपी

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पैकीपुर सहकारी समिति का 30 सितंबर का डीएपी आर्डर आज तक नहीं मिला। संवाद
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लखीमपुर खीरी/बरबर। जिले में खाद का संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा। डीएपी नहीं है तो कहीं यूरिया की कमी बनी हुई है। कहीं-कहीं कोई भी खाद नहीं है। समितियों पर खाद न होने के पीछे बड़ी लापरवाही सामने आई है। डिमांड और भुगतान भेजने के बाद भी खाद की आपूर्ति नहीं की गई। यही वजह है कि किसानों को मारामारी करनी पड़ रही है।
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जिले में एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसी समितियां हैं, जहां डीएपी की डिमांड भेजने के बाद भी आपूर्ति अब तक नहीं मिल सकी है। सबसे बड़ी अनदेखी बरबर के पैकीपुर साधन सहकारी सीमित की गई। पैकीपुर समिति की ओर से 30 सितंबर 2024 को बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से डीएपी की डिमांड की गई थी, लेकिन आज तक आपूर्ति नहीं आ सकी।
इस सीजन में अब तक पैकीपुर में डीएपी न आने से किसानों को यूरिया ही दी जा रही है। कुछ किसान बाजार से डीएपी खरीदकर फसलों की बोआई कर रहे हैं तो कुछ यूरिया से ही काम चला रहे हैं। पैकीपुर समिति के सभापति कृष्ण चंद्र श्रीवास्तव और सचिव राहुल सिंह ने बताया कि डीएपी के लिए 6.62 लाख रुपये का भुगतान 30 सितंबर को ही कर दिया था, लेकिन आपूर्ति अब तक नहीं मिल सकी है।
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बेहजम क्षेत्र में भी नहीं है खाद
बेहजम। बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण समिति अछनिया, साधन सहकारी समिति अंदापुर गौरिया पर कोई भी खाद नहीं है। ऐसे में किसान प्राइवेट खाद लेने को मजबूर हैं, जबकि सरसों, गेहूं, चना, मसूर और शरद कालीन गन्ना की बोआई जोरों पर है। वहीं मोहम्मदी के मूड़ा गालिब के जिम्मेदार भी कुछ बताने को तैयार नहीं है। यहां पर न तो डीएपी है न ही यूरिया। किसान आते हैं और लौट जाते हैं। इसके अलावा धौरहरा, पलिया, निघासन, मितौली, गोला आदि लगभग सभी जगह खाद का संकट है। संवाद


डीएपी और एनपीके में कोई एक खाद होनी चाहिए। पैकीपुर में एनपीके खाद है। 28, 29 नवंबर को रैक आने वाली है। सभी सचिवों से अपील है कि जब कहा जाए तो आरटीजीएस करें। - रजनीश प्रताप सिंह, एआर कोऑपरेटिव


सभी समितियों पर खाद भेजी जा रही है। रैक आने वाली है। रैक आते ही समितियों पर खाद भेज दी जाएगी। एक दो दिन में खाद की किल्लत खत्म हो जाएगी। -अरविंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी




राजकीय कृषि स्टोर पर नहीं गेहूं का बीज, किसान परेशान



धौरहरा। क्षेत्र में इन दिनों गेहूं की बोवाई चल रही है, बावजूद इसके किसानों को राजकीय कृषि स्टोर से बीज नहीं मिल पा रहा। इसके चलते किसान बाजार से महंगे दामों पर बीज और खाद खरीदने को मजबूर हो रहे हैं।



कफारा के किसान रामकृत वर्मा, विदेश वर्मा, रामनारायण, प्रेम नरायन भार्गव आदि बताते हैं कि सरकारी स्टोर पर गेहूं बीज और समितियों पर खाद नहीं मिल पा रही, ऐसे में हम लोग गेहूं की बोवाई कैसे करें। धौरहरा के राजकीय कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी जितेंद्र कुमार वर्मा और रमियाबेहड़ के एडीओ कृषि एवं स्टोर इंचार्ज पीतांबर सिंह ने बताया जो बीज आया था वह बिक गया। इस समय जिले पर ही बीज उपलब्ध नहीं है। दो चार दिन में आने की उम्मीद है। संवाद

पैकीपुर सहकारी समिति का 30 सितंबर का डीएपी आर्डर आज तक नहीं मिला। संवाद

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