गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर खीरी)। कोरोना महामारी देश ही नहीं पूरी दुनिया पर किसी कयामत से कम नहीं है। ऐसे में किसी धर्म जाति से ऊपर उठकर जिंदगी बचाना इंसान का पहला फर्ज बन गया है। इस महामारी के बचाव का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। लॉकडाउन में धार्मिक, सामाजिक समारोह पर रोक है, ताकि लोग एकत्र न हों और महामारी के संक्रमण को रोका जा सके। इस संकट के समय में रमजान के पाक महीने में मुस्लिम समाज के धर्मगुरुओं, मौलानाओं ने घर पर रहकर नमाज पढ़ने और अल्लाह से जल्द इस महामारी से निजात दिलाए जाने की दुआ खुदा से करने के लिए कहा है।
ऊंची भूड़ निवासी जामिया गौसिया रजविया के प्रबंधक मौलाना मुईद रजा का कहना है कि इस समय हम सबका फर्ज है कि सरकार के निर्देशों का पालन करें। मस्जिदों की बजाए रमजान की नमाज घर पर पढ़कर अल्लाह से दुआ करें। 1400 वर्ष पहले ताऊन की बीमारी फैली थी। तब हजरते उमर ने हुक्म दिया था कि घरों में ही नमाज अदा की जाए। आज भी वही करने की जरूरत है।
रसूलपुर (अमीरनगर)के मौलाना अहमद अब्दुल्ला का कहना है कि रमजान मुबारक में अपनी इबादतों के आयोजन में शासन और स्वास्थ्य विभाग के दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। घरों में रहकर इबादत करें। लॉकडाउन का पूरी तरह पालन करते रहें।
अमीरनगर के मौलाना इस्लामुल हक असद मोहम्मदी मानते हैं कि कोरोना वायरस ने बड़ा संकट पैदा कर दिया है। लॉकडाउन का पालन करते रहें। रमजानुल मुबारक के रोजे रखें। घरों में ही रहकर इबादत करें। बेवजह घरों से न निकलें।
कुकरा खुशनुमा मस्जिद के इमाम हाफिज अबरार हुसैन सैयद का कहना है कि रमजान बंदे को साबिर व शाकिर बना देता है, जिसके जरिए इंसानी हमदर्दी, दोस्ती, खुलूस, मदद का जज्बा पैदा होता है। रमजान में आपसी सद्भाव कायम रखने के लिए लॉकडाउन और शासन के आदेशों का बखूबी निर्वहन करें। तरावीह की नमाज घरों में ही पढ़ें।
गोला के मोहल्ला ऊंची भूड़ निवासी मौलाना रियाज का कहना है कि कोरोना महामारी से बचने के लिए सरकार ने जो कदम उठाए हैं उसमें सबको सहयोग करना चाहिए। अल्लाह से दुआ है कि जल्द ही इस महामारी से निजात मिले। अल्लाह हर जगह है, फिर नमाज मस्जिद में हो या घर पर।