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Lakhimpur Kheri News: क्रेशरों में पड़े ताले, सहालग शुरू होने से किसान परेशान

Thu, 06 Nov 2025 11:31 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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क्रेशर गेट के बाहर टंगी बंदी की सूचना।संवाद
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निघासन। गन्ना सीजन की शुरुआत और शादी-ब्याह की सहालग के बीच किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बंद पड़े क्रेशर बन गए हैं। सरकार की नई नीति से नाराज क्रेशर मालिकों ने अपनी फैक्टरी पर ताले जड़ दिए हैं।
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क्षेत्र के बजरंग, बाला जी, लक्ष्मी, गणेश और धारीवाल शुगर इंडस्ट्रीज के गेट पर अनिश्चितकालीन बंदी के पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। दीपावली के बाद से अब तक क्रेशरों में पेराई शुरू नहीं हो सकी है, जिससे किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। किसान नगद भुगतान के लिए क्रेशरों पर निर्भर रहते हैं। वहीं, सरकार की ओर से ऑनलाइन भुगतान की अनिवार्यता और टैक्स बढ़ाए जाने से क्रेशर संचालकों ने संचालन बंद कर दिया है।
क्रेशर प्रेसिडेंट व लक्ष्मी शुगर इंडस्ट्रीज सिसैया के मालिक जगदीश कुमार ने कहा कि टैक्स, ऑनलाइन भुगतान और गन्ने के सरकारी भाव जैसे बिंदुओं पर राहत न मिलने तक क्रेशर संचालन मुश्किल है। किसानों को नकद भुगतान न मिल पाने से दिक्कतें बढ़ रही हैं।
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बजरंग शुगर इंडस्ट्री लुधौरी के मालिक सुधीर कपूर ने बताया कि इस बार रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बदली गई है और टैक्स भी बढ़ा दिया गया है। सरकार चाहती है कि भुगतान पूरी तरह ऑनलाइन हो, जबकि किसानों की सुविधा नकद भुगतान में है। नई नीति में किसान और क्रेशर दोनों का नुकसान हो रहा है।

धारीवाल क्रेशर सिंगाही के मालिक हरप्रीत सिंह धारीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने गन्ने का भाव 355 रुपये तय किया है, जबकि राज्य सरकार ने 400 रुपये कर दिया है। इतने अंतर में क्रेशर चलाना घाटे का सौदा है, क्योंकि तैयार चीनी के दाम नहीं बढ़े हैं।

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किसानों की फसल और गृहस्थी पर असर
किसान अमित सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष नकद व ऑनलाइन दोनों तरह से भुगतान होता था, जिससे सबकी सुविधा बनी रहती थी। इस बार टैक्स और नई प्रक्रिया के चलते क्रेशर बंद हैं। वहीं, किसान राजेंद्र प्रसाद जायसवाल ने कहा कि मिलों में भुगतान में समय लगता है, जबकि क्रेशरों पर तुरंत पैसा मिल जाता है। बंदी से किसानों की बोआई और गृहस्थी दोनों प्रभावित हो रही हैं। ।
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