बैटरी और बूस्टर फटने से विस्फोट होने का था दावा
दूसरे दिन भी अपने दावे पर अड़े रहे सीओ धौरहरा
धौरहरा कसबे में मोहम्मद शफी के घर में हुए विस्फोट मामले में पुलिस की लापरवाही परत दर परत खुलकर सामने आ रही है। फोरेंसिक एक्सपर्टों की मानें तो धमाका बारूद के फटने से हुआ था। टीम को मौके से बारूद जैसे चमकीले कण भी मिले हैं, लेकिन जांच के दौरान बैटरी और बूस्टर के अवशेष टीम को नहीं मिले हैं। जिससे विस्फोट को लेकर पुलिस और घर वालों का किया जा रहा दावा जहां झूठा साबित हुआ है। वहीं पुलिस की सक्रियता और नीयत भी सवालों के घेरे में आ गई है। खासबात यह है कि सीओ धौरहरा मंगलवार को भी अपने दावे पर अड़े रहे।
धौरहरा कसबे में जिस बाजार वार्ड में विस्फोट हुआ था। उसमें काफी घनी बस्ती है। विस्फोट की तीव्रता को लेकर यह बात किसी के गले नहीं उतर रही थी कि यह धमाका इंवर्टर की बैटरी और बूस्टर के फटने से हुआ था। माना जा रहा है कि बारूद की बात छिपाने के लिए ये दावे किए जा रहे थे। बारूद से विस्फोट होने पर पुलिस पर सवाल खड़े होते कि बीच बाजार बारूद का जखीरा था तो पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की। धौरहरा के प्रभारी कोतवाल अमर सिंह और धौरहरा सीओ मनोज यादव का भी दावा था कि विस्फोट बैटरी के फटने से ही हुआ है, लेकिन पुलिस का यह दावा काफी देर तक नहीं टिक सका।
मंगलवार को पहुंची विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ की टीम की जांच में उनके दावों की पोल खोल दी। केमिकल विशेषज्ञों की जांच में बैटरी और बूस्टर के अवशेष न मिलने से यह बात को साफ हो गई कि विस्फोट बैटरी व बूस्टर के फटने से नहीं हुआ। केमिकल विशेषज्ञों की माने तो मौके से ईंटों, फर्श आदि पर मिले चमकीले कण बारूद के हैं। काफी संख्या में चिपके मिले चमकीले कण इस आशंका को बल मिल रहा है कि धमाका रासायनिक विस्फोटक पदार्थों से हुआ है।
आज आईजी एटीएस से धौरहरा में हुए धमाके के संबंध में विस्तृत बात हुई और उनसे जांच कराने का अनुरोध किया गया था। इसलिए एटीएस की टीम भी आई थी। सीएफएलएस की टीम ने नमूने जुटाए हैं। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहा जा सकेगा।
- ए सतीश गणेश, आईजी जोन लखनऊ