13 साल पहले हुई घटना पर अब आया फैसला
दलित युवक को मारपीट कर बुरी तरह घायल करने के मामले में एडीजे लालता प्रसाद ने दो लोगों को दोषसिद्ध पाया है। अदालत ने दोषसिद्ध दोनों हमलावरों को चार-चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है साथ ही प्रत्येक पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद सिंह ने अभियोजन पक्ष रखते हुए बताया कि मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव पिपरिया खगई निवासी चेतराम को आठ अक्तूबर 1993 की शाम को गांव महमदपुर के देवीदयाल और उसके साथियों ने पकड़ लिया था, आरोप है कि दबंगई दिखाते हुए उससे शराब खरीदकर लाने को कहा था, चूंकि उसके पास पैसे नहीं थे इसलिए वह उन लोगों से बचकर घर भाग आया था। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते 10 अक्तूबर की सुबह जब वह अपने भाई गंगाराम के साथ भारत की गुड़ की बेल पर मजदूरी करने गया था। तभी देवीदयाल, बालक, बादशाह और नेपाल यादव आदि ने उसे जातिसूचक गालियां देते हुए बुरी तरह मारापीटा जब बेल के स्वामी भारत ने बचाने की कोशिश की तो उसे भी मारापीटा।
इस मामले में अदालत ने सुनवाई के बाद बालक और देवीदयाल को दोषी पाते हुए चार-चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह व्यवस्था दी है कि वसूल की जाने वाली जुर्माने की रकम में से तीन चौथाई धनराशि पीड़ित चोटिल को बतौर मुआवजा अदा की जाए।