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दूसरे दिन भी दिखा छात्रों में आक्रोश

Sat, 27 Aug 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मितौली (लखीमपुर खीरी)।
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student - फोटो : amar ujala
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जवाहर नवोदय विद्यालय में नारेबाजी कर किया प्रदर्शन
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लखनऊ से आए सहायक आयुक्त ने छात्रों से की वार्ता
प्रदर्शन के दौरान नकाब से ढके रहे छात्रों के चेहरे
जवाहर नवोदय विद्यालय में शुक्रवार को हुए छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन और भूख हड़ताल का मामला शांत होने के बाद शनिवार को फिर उखड़ गया। नवोदय विद्यालय समिति लखनऊ के सहायक आयुक्त करमचंद जांच करने परिसर में पहुंचे, जहां उन्होंने स्टाफ और छात्रों से बातचीत की। प्रधानाचार्य को हटाने के मुद्दे पर छात्र भड़क गए और भूख हड़ताल के पोस्टर हाथों में लेकर प्रदर्शन करने लगे। क्लासेज का बहिष्कार किया, जिससे पढ़ाई नहीं हो सकी। दोपहर का खाना भी नहीं खाया, जिससे परिसर में तनाव की स्थिति बन गई। इससे स्टाफ और अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सहायक आयुक्त ने उच्चाधिकारियों से वार्ता कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद शाम छह बजे छात्रों ने खाना खाया।
बता दें कि जवाहर नवोदय विद्यालय के विद्यार्थियों ने शुक्रवार को प्रधानाचार्य को हटाने की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर प्रदर्शन किया था। एसडीएम मंशाराम और तहसीलदार आशुतोष गुप्ता के दखल और कार्रवाई के आश्वासन पर मामला शांत हो गया था। एसडीएम ने प्रधानाचार्य अनीता कुमारी को 15 दिन के लिए हटाने तथा उप प्रधानाचार्य आभा शुक्ला को चार्ज देने का आश्वासन दिया था। तब छात्रों ने हड़ताल समाप्त कर दोपहर का खाना खाया था। शनिवार को छात्र-छात्राओं ने सुबह का नाश्ता भी किया, लेकिन इसी दौरान उन्हें पता चला कि प्रधानाचार्य विद्यालय में ही है और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे छात्र फिर भड़क गए। छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर हास्टल की दीवारों पर फिर से प्रधानाचार्य के खिलाफ पोस्टर चस्पा कर दिए। इसी बीच सहायक आयुक्त करमचंद भी विद्यालय पहुंच गए। उन्होंने छात्र-छात्राओं और स्टाफ के साथ कई बार अलग-अलग वार्ता की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। वहीं छात्रों ने चेहरे पर नकाब ढककर खाने की थालियां और चम्मच लेकर हास्टलों के बाहर प्रदर्शन किया। 
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छात्रों ने प्रधानाचार्य और एसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नक्सलियों की तरह चेहरा ढककर छात्रों ने मीडिया और पुलिस के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। सीतापुर के खैराबाद जवाहर नवोदय के प्रधानाचार्य रविंद्र कुमार चौधरी भी मीडिया कर्मियों से उलझ गए। शाम तक वार्ताओं का दौर चला। इस बीच सीओ निष्ठा उपाध्याय, एसडीएम मंशाराम भी पहुंचे। शाम करीब छह बजे एसी के आश्वासन पर छात्र मान गए और फिर खाना खाया। तब अधिकारियों ने राहत की सांस ली। 

कई दिन पहले ही लिखी जा चुकी थी स्क्रिप्ट
मितौली। जवाहर नवोदय विद्यालय में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने के लिए लालायित रहते हैं, लेकिन छात्रों के उग्र प्रदर्शन और रवैये ने सबको हैरान कर दिया है। ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे प्रदर्शन से पहले ही पूरी स्क्रिप्ट तैयार की गई हो। आवासीय विद्यालय में एकाएक छात्रों द्वारा प्रधानाचार्य का तख्ता पलटने का प्रयास ऐसे ही बातों को बल देने के लिए काफी हैं। अनुशासन को ताक पर रखकर मनमानी पर उतरे छात्रों पर अंकुश लगाने में शिक्षक समेत स्टाफ की विफलता गंभीर सवाल उठा रही है, क्योंकि यह पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व भी वर्ष 2013 में छात्र उग्र हो चुके हैं। 
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विद्यालय में 399 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें कक्षा छह से आठ तक के हैं। उनका भी प्रदर्शन में शामिल होना अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऐसे प्रदर्शनों से उन पर क्या असर पड़ेगा, जिस पर चिंतन करने की जरूरत है। विद्यालय में मांगों को लेकर जिस तरह अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, उससे ऐसे सवाल उठना लाजिमी हैं। इस घटनाक्रम में मुख्य रूप से प्रधानाचार्य को हटाने की आवाज बुलंद की गई, जिन्होंने 17 अगस्त को हुई रैगिंग मामले में छात्रों के अभिभावकों को सूचना दी थी। इसके बावजूद अभिभावकों ने गौर नहीं किया। कैंपस में भय का माहौल व्याप्त है। खासकर जूनियर कक्षाओं के बच्चे कुछ भी बोलने से डर रहे हैं और सवाल पूछने पर सीनियर छात्रों की ओर इशारा भर कर देते हैं। विद्यालय प्रशासन मामले को पूरी तरह चहारदीवारी के अंदर ही दबाना चाहता है। अचानक प्रधानाचार्य के खिलाफ सभी छात्रों को एकजुट करना आसान नहीं है। संभावना इस बात की भी जताई जा रही है कि पूरे घटनाक्रम के पीछे विद्यालय स्टाफ के कुछ लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनके इशारे पर छात्रों ने नियम-कायदे ताक पर रखकर प्रदर्शन किया।
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