- शराब की शीशियां और अन्य सबूतों की अनदेखी कर रही पुलिस
- जानकारी के बाद भी कब्जे में नहीं लिया गया सामान
थाना फरधान के गांव मन्योरा निवासी दिलीप और हरीश की मौत की गुत्थी दूसरे दिन भी उलझी रही। हालांकि दूसरे दिन परिवार वालों को यह जानकारी हो गई कि दोनों ने बेरिहा ताल के पास बैठकर शराब पी थी। मौके पर दो खाली शीशियां, चार डिस्पोजल गिलास, दो खाली पॉलिथीन और नमकीन पैकेट के रैपर पड़े हैं। पुलिस की संजीदगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देशी शराब की शीशियों समेत सामान पड़ा रहा, लेकिन पुलिस ने उसे साक्ष्य के रूप में कब्जे में लेने की भी जरूरत नहीं समझी। यहां तक कि दूसरे दिन मामले में पुलिस ने गांव भी नहीं गई और न ही किसी के परिवारीजन ने कोई तहरीर ही पुलिस को दी। हालांकि एसओ रामकुमार यादव को दूसरे दिन भी तहरीर मिलने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार रहा। परिवार वालों ने किसी भी रंजिश से इनकार किया है। उधर, एसपी अखिलेश चौरसिया ने मामले का जल्द खुलासा करने की बात कही है।
मालूम हो कि मन्योरा गांव निवासी रामकृष्ण का पुत्र हरीश और रामभजन का पुत्र दिलीप आपस में गहरे दोस्त थे। दोनों की संदिग्ध परिस्थितियों में दारू में कीटनाशक पदार्थ मिलाकर पीने से शुक्रवार की रात मौत हो गई थी। शनिवार की शाम को गांव में ही दोनों के शवों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इधर, रविवार की सुबह मृतक हरीश का बड़ा भाई सुधीर शौच के लिए गया तो गांव के दो युवकों ने बताया कि दोनों बेरिहा तालाब के पास दारू पी रहे थे। इस पर सुधीर बेरिहा तालाब के पास पहुंचा तो वहां देशी शराब की दो खाली शीशियां, चार डिस्पोजल गिलास, दो खाली पॉलिथीन और नमकीन पैकेट के रैपर पड़े देख वह हैरान रह गया। अमर उजाला संवाददाता के पहुंचने पर भी उसने यह सामान पड़ा दिखाया। इस पर एसओ फरधान रामकुमार यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि पुलिस की विवेचना चल रही है। परिवार वाले कोई तहरीर देते हैं अथवा पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल जाती है तो विवेचना में गति लाई जाएगी। हालांकि उन्होंने इतना बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बिसरा प्रजर्व कर लिया गया है, फिर भी रिपोर्ट मिलने पर कई पहलू सामने आ सकते हैं। उधर, रविवार की शाम तक पुलिस ने मौके पर पड़ी खाली शीशियों को भी कब्जे में लेने की जरूरत नहीं समझी, जबकि यह साक्ष्य के तौर पर काम आ सकती हैं।
कहीं दो की जगह चार तो नहीं थे शराब पीने वाले
दोनों दोस्तों ने जिस स्थान पर कीटनाशक मिलाकर शराब पी, उस स्थान पर चार डिस्पोजल गिलास पड़े मिले हैं। जो इस ओर इशारा करते हैं कि पीने वालों की संख्या चार तो नहीं थी। इसके बाद दोनों की चल दिए। हरीश तो कुछ दूर जाकर गन्ना काटकर खाली किए गए खेत में पेड़ की छांव में अचेत अवस्था में मिला था, जबकि दिलीप लड़खड़ाता हुआ अपने घर के आंगन में गिर गया था। उसने दारू में दवाई मिलाकर खुद और हरीश के पीने की बात अपनी भाभी रेनू को बताई थी।
दोनों मजदूर पेशा हैं परिवार
मृतक हरीश सहित चार भाई हैं और महज चार बीघा जमीन है, जबकि दिलीप सहित दो भाई हैं और मात्र एक बीघा जमीन है। दोनों ही पढ़े लिखे नहीं थे और दोनों के परिवार मजदूर पेशा हैं।