नीमगांव थाना क्षेत्र के गांव रामपुर निवासी वेदप्रकाश वर्मा हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है, जिसमें वादी (पुत्र) ही अपने पिता का हत्यारा निकला है। पिता की हत्या में चाचा जगदीश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने वाले विक्रम ने अपने दोस्त के साथ मिलकर हत्या का प्लान बनाया, जिसके बाद भाड़े के हत्यारों से उसने अपने पिता की हत्या करा दी थी। पुलिस ने मृतक के पुत्र विक्रम समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर चालान भेजा है। जबकि एक हत्यारोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।
10 मई 2015 की रात को रामपुर निवासी वेदप्रकाश वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दूसरे दिन 11 मई को थनियनपुरवा के निकट नाले के पास से उसका शव बरामद हुआ था। इस मामले में मृतक के पुत्र विक्रम ने अपने चाचा यानी मृतक के भाई जगदीश वर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। एसपी अरविंद सेन ने बताया कि आरोपी जगदीश के कोई संतान नहीं है और न ही कोई विवाद था। इससे जगदीश के हत्या किए जाने का कोई मोटिव समझ में नहीं आ रहा था। विवेचना के दौरान महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे, जिससे पूरी कहानी ही कुछ और निकलकर सामने आई। मृतक के पुत्र विक्रम (वादी) ने अपने दोस्त के साथ साजिश रचकर भाड़े के हत्यारों से अपने पिता की हत्या करा दी, इसके बाद घटना को डायवर्ट कर अपने चाचा को फंसाने की पूरी साजिश रची थी।
दोस्त के साथ बनाई थी पूरी योजना
पुलिस के मुताबिक घटना का मुख्य सूत्रधार विक्रम और उसका दोस्त अखिलेश मिश्रा है। इसके बाद ही प्लान बनाया गया, जिसमें तय हुआ कि विक्रम चार बीघा जमीन बेचकर ढाई लाख रुपये भाड़े के हत्यारों को देगा।
हत्याकांड में दो सगे भाई भी शामिल
हत्या की डील फाइनल होने के बाद सिकंद्राबाद निवासी अखिलेश मिश्रा ने अपने भाई सरोज मिश्रा को इस काम के लिए तैयार किया, जिसने अपने सहयोगी सिकंद्राबाद निवासी पप्पू पंडित के साथ मिलकर 10 मई 2015 की रात करीब 11 बजे वेदप्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी।
हत्या में प्रयोग किया गया तमंचा बरामद
घटना के सिलसिलेवार पहलुओं को जोड़ने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों को संकलित किया। इसके बाद नीमगांव पुलिस ने वादी विक्रम को उसके घर रामपुर से और अखिलेश तथा सरोज को सिकंद्राबाद पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार कर लिया। सरोज की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में शामिल 315 बोर का तमंचा भी बरामद कर लिया। जबकि हत्याकांड में शामिल अभियुक्त पप्पू पंडित की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
सरोज पर पहले से दर्ज है हत्या का मुकदमा
पुलिस के मुताबिक अभियुक्त सरोज मिश्रा शातिर अपराधी है। एक साल पहले ही हत्या के मामले में जेल से जमानत पर रिहा हुआ था। उसने अपने छह सहयोगियों के साथ मिलकर सीतापुर जिले के थाना लहरपुर के गांव महुआताल में 14 फरवरी 2013 की रात को दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी थी। यह हत्या भी भाड़े पर की गई थी।
एक तीर से दो निशाने लगाए थे विक्रम ने
पिता की हत्या के साथ विक्रम ने दो मकसद साधे थे, जिसमें बलि का बकरा अपने चाचा को बनाया था। बकौल विक्रम उसका पिता जमीन को बेच रहा था, तो वहीं चाचा के कोई संतान नहीं थी। वह अपने पिता की हत्या में चाचा को फंसाकर जेल भेजवाना चाहता था, जिसके बाद चाचा की पूरी प्रापर्टी उसकी हो जाती।
अभियुक्तों पर होगी गैंगेस्टर की कार्रवाई
हत्याकांड में शामिल तीनों अभियुक्तों के खिलाफ पुलिस गैैंगेस्टर की कार्रवाई करेगी। एसओ बृजेंद्र यादव ने बताया कि तीनों हत्यारोपी भाड़े पर जघन्य वारदातों को अंजाम देते हैं।
एसपी ने टीम को दिया ढाई हजार का पुरस्कार
हत्याकांड का खुलासा करने में एसओ नीमगांव बृजेंद्र सिंह यादव के साथ एसआई नंदलाल राम, सिपाही शिवकुमार, रामदेव, विनोद मिश्रा, राकेश कुमार शामिल रहे। एसपी अरविंद सेन ने घटना के खुलासे पर टीम को शाबाशी देने के साथ ही ढाई हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप दिया है।
प्रधान भी करेंगे पुलिस टीम को सम्मानित
सिकंद्राबाद। वेदप्रकाश हत्याकांड का निष्पक्ष ढंग से खुलासा करने पर प्रधान अब्दुल माबूद खां ने पुलिस टीम को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि बेहद शातिर अंदाज से हुए हत्याकांड का निष्पक्ष खुलासा कर पुलिस ने सराहनीय कार्य किया है, जिसके लिए जल्द ही उन्हें सम्मानित किया जाएगा।