सिपाही की हत्या के सभी दोषी एक ही परिवार के
एक आरोपी की सुनवाई के दौरान हो चुकी है मौत
गश्त और दबिश के दौरान सिपाही को पीट-पीटकर मार डालने के मामले में एडीजे बाबूराम ने छह महिलाओं सहित एक ही परिवार के दस सदस्यों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन का पक्ष रखते हुए एडीजीसी श्रीपाल जायसवाल ने बताया कि पसगवां थाना क्षेत्र के जंगबहादुरगंज चौकी क्षेत्र में पुलिस गश्त और दबिश के लिए 9 अक्तूबर 2003 को कांस्टेबल फूलचंद्र परचेता, कांस्टेबल रामनरेश यादव के साथ जीप चालक सिपाही माशूक बेग जा रहे थे। जैसे ही वे ग्राम सोनौरा पहुंचे तभी रघुबर और बंधा के परिवार के दर्जनों लोगों ने उन पर हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों को बंधक बनाकर मार पीट करते हुए माशूक बेग की पीट-पीटकर मार डाला।
इन लोगों ने हमला करते हुए ड्यूटी के पुलिस सिपाहियों के साथ लूटपाट की और सरकारी रायफल भी छीन ली थी। पुलिस ने हत्या, डकैती का मामला दर्ज करते हुए एक ही परिवार की छह महिलाओं सहित 12 लोगों को आरोपी बनाया था जिसमें एक आरोपी नाबालिग था। इस वारदात के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने इन लोगों के खिलाफ संगठित गिरोह बनाकर आर्थिक अपराध करने का भी आरोप लगाते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए रामाधार, हरिश्चंद्र, मनीष, जयसिंह, रघुबर, राजरानी, मालती, झब्बो, सुशीला देवी उर्फ रुचि तथा गीता सिंह को दोषी पाते हुए सभी को अजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही सभी पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। मुख्य नामजद आरोपी शैलेंद्र की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।