हारते-हारते जीत गई सच्चाई
किशोरी को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और उससे दुराचार करने के मामले में एडीजे एफटीसी नीलू मोघा ने आरोपी को सात वर्ष की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी निर्मल चौधरी ने बताया कि ईसानगर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली नाबालिग किशोरी को गांव चिंतापुरवा मजरा वीरसिंहपुर निवासी रफीक 16 अगस्त 2012 को बहला फुसलाकर भगा ले गया था। किशोरी के परिजनों ने खोजबीन के बाद पुलिस में शिकायत की तो पुलिस ने जांच के दौरान 11 सितंबर 2012 को किशोरी को बरामद कर आरोपी के चंगुल से मुक्त कराया था। इस मामले में किशोरी के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान पिता के अदालती बयान होने से पहले ही मौत हो गई, जो अभियोजन केस के लिए हानिकारक रहा। पीड़िता की माता ऊषा देवी, भाई योगेश कुमार के साथ ही खुद पीड़िता अपने बयान से मुकर गई और अदालत में अभियुक्त के बचाव में ही बयान दिया, लेकिन अदालत की पारखी निगाहों से हकीकत बच नहीं सकी, जब किशोरी का चिकित्सीय परीक्षण करने वाले डॉ.वीके वर्मा, मौजूदा सीएमएस डॉ. मीरा वर्मा और उसे स्कूल में प्रवेश व शिक्षा देने वाले शिक्षक अमरीश कुमार ने अदालत में अपने बयान दिए तो हकीकत सामने आ गई, जिससे साफ हो गया कि किशोरी घटना के वक्त नाबालिग थी, लिहाजा उसके साथ संपर्क बनाने के मामले को अदालत ने दुराचार माना। अदालत ने शुक्रवार को अपने फैसले में आरोपी रफीक को दोषसिद्ध करते हुए सात वर्षो के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।