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अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर गैंगरेप गटक रही पुलिस

Sat, 13 Aug 2016 10:14 PM IST
टीएन अवस्थी/लखीमपुर खीरी।
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गैंगरेप
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 गैंगरेप मामले में सामने आया पुलिस का खेल 
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कोर्ट में नहीं कराए बयान और न पूरी हो सकी मेडिकल प्रक्रिया
डॉक्टरों की मानें तो इतने दिनों बाद मुश्किल होगी रेप की पुष्टि
थाना निघासन क्षेत्र में गैंगरेप का आरोप लगाने वाली 17 वर्षीय किशोरी के मामले में पुलिस का खेल सामने आया है। घटना के नौ दिन बाद चार अगस्त को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की और उसे छह अगस्त को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा, लेेकिन मेडिकल परीक्षण के आठ दिन बाद भी मेडिकल प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। पुलिस की हीलाहवाली में घटना को 18 दिन बीत गए। यहां तक पुलिस को उसके मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत बयान कराने की भी फुर्सत नहीं मिली। डॉक्टरों की मानें तो लंबा समय बीतने के कारण मेडिकल रिपोर्ट में ज्यादती की पुष्टि होने की संभावनाएं कम हो गई हैं। 
रेप, गैंगरेप पीड़िताओं की मेडिकल प्रक्रिया समय से पूरी न होने के कारण आरोपियों को लाभ मिल जाता है और हैवानियत दिखाने वाले आरोपी कानून के शिकंजे में फंसने से बच जाते हैं। ऐसे में ही पुलिस की मिलीभगत का सवाल उठता है। ऐसा ही कुछ सामने आया थाना निघासन क्षेत्र में 27 जुलाई को एक किशोरी के मामले में। पीड़ित किशोरी ने गांव के ही चार लोगों पर एक महिला की मदद से गैंगरेप का आरोप लगाया था। पुलिस की कार्यशैली ऐसी रही है कि उसी पर सवाल उठ रहा है। किशोरी और उसके पिता का आरोप था कि शिकायत करने गए तो पुलिस ने डराया धमकाया। फिर नौवें दिन चार अगस्त को केवल अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की थी लेकिन मेडिकल के लिए छह अगस्त को ले जाया गया। 
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जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर यामिनी ने बताया कि निघासन पुलिस द्वारा लाई गई पीड़िता का मेडिकल परीक्षण छह अगस्त को हुआ है। घटना होने से लेकर मेडिकल परीक्षण होने तक 11 दिन बीत गए। डॉक्टरों की मानें तो पीड़िता में चार दिन तक सीमेन रहते है। अधिकतम 48 घंटे के भीतर यदि मेडिकल परीक्षण की प्रकिया पूर्ण हो जाती है तो रेप की पुष्टि होने की पूरी संभावना रहती है। समय अधिक होने पर प्राइवेट पार्ट पर चोट आदि के घाव भी भर जाते हैं। स्पर्म भी मृत हो जाते हैं, जिससे पुष्टि की संभावनाएं क्षीण हो जाती हैं। केमिकल से स्लाइड की जांच होने पर भी अधिकतर नतीजा सिफर ही रहता है। खासबात यह है कि पुलिस को 18 दिन बाद भी इतनी फुर्सत नहीं मिल सकी ताकि वह कोर्ट में धारा 164 के तहत पीड़िता के बयान करा सकती। कुल मिलाकर पूरे प्रकरण में पुलिस की कार्यशैली पर तमाम सवाल खड़े हो गए हैं। 

सुलगते सवाल
0 27 जुलाई को ही रिपोर्ट दर्ज कर मेडिकल परीक्षण कराना चाहिए, लेकिन पुलिस ने ऐसा क्यों नहीं किया?  
0 चार अगस्त को अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की तो छह अगस्त को क्यों मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा
0 पुलिस के पास ऐसी क्या दिक्कत थी जो उसे दो दिन बाद मेडिकल परीक्षण के लिए भेजना पड़ा। 
0 पुलिस घटना के 18 दिन बाद भी पीड़िता के कोर्ट में बयान क्यों नहीं करा सकी ?
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