एक शातिर ठग ने उत्तरी वन प्रभाग क्षेत्र के खैरीगढ़ स्थित रिजर्व फारेस्ट की वन संपदा का सौदा कर हरियाणा के लकड़ी व्यापारी से 28 लाख 2100 रुपये ठग लिए। ठग ने 165 एकड़ भूभाग में फैली वन संपदा का 10 करोड़ रुपये में सौदा तय किया था, जिसके बाद वन विभाग से 35 एकड़ का रवन्ना (कटान परमिट) मिलने की बात कहकर उसने हरियाणा के व्यापारी से 28 लाख 2100 रुपये बतौर पेशगी ले लिए। जब व्यापारी को कटान करने संबंधी कागजात नहीं मिले और आरोपी भी टाल-मटोल करने लगा, तो व्यापारी का माथा ठनका। व्यापारी ने लखीमपुर आकर मामले की पड़ताल की तो जंगल और उसकी वन संपदा रिजर्व फारेस्ट की निकली। उसको ठगे जाने की जानकारी हुई तो रुपये वापस लेने के लिए शहर में डेरा डाल दिया। आरोपी से रुपये न मिलने पर उसने कोतवाली पुलिस से शिकायत की है।
‘बंटी और बबली’ फिल्म की कहानी की तर्ज पर ही आरोपी ने ठगी का नायाब प्लान तैयार किया और इसे परिचित व्यापारी पर ही आजमा डाला। हरियाणा के जनपद भिवानी के मोहल्ला कोहर निवासी लकड़ी व्यापारी सुखवीर की मुलाकात पीलीभीत में शैलेंद्र कुमार दीक्षित निवासी मोहल्ला गोपालनगर कोतवाली सदर लखीमपुर से हुई थी। बकौल सुखवीर पीलीभीत में मुलाकात के दौरान शैलेंद्र ने उससे लखीमपुर में लकड़ी का व्यापार करने का ऑफर दिया। इसके बाद वह और उसका पार्टनर हरियाणा निवासी प्रदीप यादव लकड़ी का सौदा करने 2013 में लखीमपुर आया था। इसके बाद शैैलेंद्र उन्हें खैरीगढ़ स्थित जंगल में ले गया, जहां रिजर्व फारेस्ट की वन संपदा को अपना बताकर व्यापारी से 10 करोड़ में सौदा तय कर दिया। साथ ही व्यापारी को विश्वास में लेते हुए आरोपी ने हुए वन विभाग से कटान परमिट और निकासी के कागज अपने खर्च पर बनवाने का झांसा दिया। जंगल में खड़े पेड़ों को देखकर व्यापारी को भी फायदे का सौदा लगा। इसके बाद आरोपी ने व्यापारी से कई किस्तों में 28 लाख 2100 रुपये ले लिए और 35 एकड़ जंगल कटान के कागज तैयार होने का आश्वासन भी दिया। काफी समय बीत जाने पर जब व्यापारी को कटान का परमिट नहीं मिला तो उसे शक हुआ। मामले की तहकीकात करने लखीमपुर आया, तो उसके पैरो तले से जमीन ही खिसक गई। क्योंकि जिस जंगल की वन संपदा का सौदा किया था, वह रिजर्व फारेस्ट की जमीन निकली। लिहाजा खुद को ठगे जाने का अहसास होने पर सुखवीर ने आरोपी से रुपये मांगे, तो उसने हाथ खड़े कर दिए। थक हारकर सुखवीर ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है, जिसमें उसने सबूत के तौर पर आरटीजीएस से भुगतान किए गए रुपये की बैंक स्लिप भी दी। लकड़ी व्यापारी सुखवीर ने बताया कि करीब डेढ़ साल से रुपये वापस लेने के लिए लखीमपुर के एक होटल में डेरा डाल रखा है। उधर, आरोपी शैलेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया हैै कि हरियाणा के व्यापारी प्रदीप यादव से लेनदेन का मामला निपट गया हैै। पुलिस उसेेे बेवजह प्रताड़ित करना चाहती है।
एसएसआई, सदर कोतवाली रामअवतार यादव ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, जिसकी प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि हुई है। आरोपी से पूछताछ के लिए उसकी तलाश की जा रही है। सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।