मझगईं में भीषण गंदगी, संक्रामक रोगों का प्रकोप
इलाके में पड़ रही गर्मी और भीषण गंदगी से संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है। शुक्रवार की रात डायरिया पीड़ित वृद्धा को पीएचसी ले जाया गया, लेकिन यहां स्टाफ न मिलने के कारण इलाज में देरी हुई। एक निजी डॉक्टर ने इलाज शुरू किया, लेकिन हालत बिगड़ने से उसकी मौत हो गई।
कस्बा निवासी महेश शर्मा ने बताया उनकी 60 वर्षीय मां सुमित्रा देवी को शुक्रवार शाम करीब पांच बजे उल्टी और दस्त शुरू हो गए। कस्बे की पीएचसी में किसी चिकित्सक के न होने पर मजबूरन एक प्राइवेट चिकित्सक बुलाया गया। डॉक्टर ने डायरिया होने की बात बताई। इसके बाद चिकित्सक ने जैसे ही ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने की तैयारी की उससे पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। महिला के शिक्षक पुत्र महेश शर्मा और परिवारीजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। मालूम हो कि इससे पांच दिन पूर्व इसी तरह बेला निवासी रामआसरे की भी मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके के गांव की सफाई न होना और कई सालों से दवा का छिड़काव न होने से संक्रामक रोगों का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
फार्मेसिस्ट के सहारे है पीएचसी
कसबे की पीएचसी में कोई डॉक्टर नहीं है। यहां फार्मेसिस्ट जेके पटेल जब लखीमपुर से आते हैं तो मरीजों को दवाएं देते है। ग्रामीण विनोद कुमार, वेदप्रकाश, मुमताज खां, आफताब खां, शहीदूल खां, विकास, विनय कुमार, दिनेश आदि ने कहा कि कस्बे की पीएचसी में किसी चिकित्सक के न होने से मरीजों को प्राथमिक उपचार नहीं मिल पा रहा है और दवा आदि का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा है।