भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मुहाना नदी के घाटों पर खाद, बीज, मादक पदार्थ, कपड़ा प्याज, मिर्च आदि की तस्करी के बाद अब गन्ने की तस्करी जोरों पर शुरू हुई है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक नाव के जरिए भारी मात्रा में गन्ना माफिया नेपाल से सीमा पार कर बेलरायां स्थित सरजू सहकारी चीनी मिल को गन्ना सप्लाई कर रहे हैं। जबकि यहां पर्चियां न मिलने के कारण किसानों का गन्ना खेत में ही सूख रहा है।
सरजू सहकारी चीनी मिल क्षेत्र में करीब 33 गन्नाक्रय केंद्र आते है। इन क्रय केंद्रों के अंर्तगत आने वाले क्षेत्रों में अभी भी करीब 50 फीसदी गन्ना खेतों में खड़ा है। नेपाल बार्डर से लेकर पूरे क्षेत्र में गन्ना माफिया सक्रिय हैं। फर्जी सट्टा बनवाकर किसानों का गन्ना कम मूल्य पर खरीदकर चीनी मिल को सप्लाई करते हैं। क्रेशरों और कोल्हू पर गन्ने का रेट बढ़ने के कारण गन्ना माफिया ने नेपाल की ओर रूख किया है।
गन्ना माफिया भारत-नेपाल सीमा पर बने गुलरिहा, मरिया, खखरौला, कौड़ियाला, कौवाखेड़ा आदि घाटों से नेपाल के गांव भजनी, टीकापुर, जोशीपुर, पिरथीपुर चर्रा, लौकिहा आदि गांवों से 130 से 180 रुपये में गन्ना खरीदकर अपनी पर्चियों का कोटा पूरा करने के लिए बेलरायां चीनी मिल को गन्ना सप्लाई करते हैं।
जीएम, सरजू सहकारी चीनी मिल वीएस राजकुमार ने बताया कि यह सही है कि कुछ फर्जी सट्टा बने है। उनकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही नेपाल बार्डर पर गन्ना तस्करी रोकने का मिल को कोई अधिकार नहीं है।
एसएसबी तृतीय वाहिनी सेनानायक कमल भगत ने बताया कि गन्ना तस्कारी को रोकने के लिए टीम गठित की जाएगी। किसी भी कीमत पर तस्करी नहीं होने दी जाएगी।