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अंतरजनपदीय गिरोह से कई घटनाओं का खुलासा

Wed, 18 Feb 2015 06:09 PM IST
लखीमपुर खीरी
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सिसैया में पुलिस और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास से गन्ने के खेत से पकड़े गए बदमाशों से सीतापुर, ढखेरवा में सर्राफ, सरसवां में बीज भंडार के मुनीम समेत कई लोगों से हुईं लूट की घटनाओं का खुलासा हुआ है। इनके कब्जे से 64 हजार नगद, चोरी और लूट की 11 बाइक, दो किलो चांदी, चार मोबाइल बरामद किए गए हैं। गिरोह का सरगना फरार बताया जा रहा है।
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पुलिस लाइंस में एसपी अरविंद सेन के पत्रकारों को बताया कि 14 फरवरी को किसान बीज भंडार के मुनीम रियाजुद्दीन के साथ रंजीतगंज पुल पर हुई लूट की घटना के खुलासे के  लिए सीओ मनोज यादव की अगुवाई में धौरहरा कोतवाल नंदजी यादव और ईसानगर एसओ आरपी यादव को छानबीन के लिए लगाया गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने सिसैया के बीज भंडार के दुकानदार जियायुद्दीन को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जिसके बाद ग्रामीणों के सहयोग से रेहुआ-सरसवां रोड पर मुठभेड़ के दौरान तंबौर निवासी संदीप वर्मा और बट्टू उर्फ नसीम को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक दुकानदार  जियायुद्दीन ने ही रियाजुद्दीन की मुखबिरी बदमाशों से की थी। तीनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने इनके कब्जे से लूट और चोरी का काफी सामान और तमंचा-कारतूस बरामद किया है। बदमाशों से खुलासा हुआ कि उन्होंने 14 बाइक की लूट और चोरी की थी, इनमें 11 बरामद कर ली गई हैं। एसपी ने बताया कि बदमाशों ने सीतापुर के थाना सरदपुर अंतर्गत गांव गुडैचां चौराहा के सर्राफा व्यापारी से लूट की भी वारदात स्वीकार की है।
ढखेरवा के सर्राफ की रिश्तेदार ने की थी मुखबिरी
24 नवंबर 2014 की ढखेरवा स्थित दुकान से घर लौटते समय बाइक सवार सर्राफ राजेश को सरेशाम तमंचा दिखाकर लूटने की घटना में संदीप, उसका साथी अंकित और राजकुमार शामिल था। राजेश की मुखबिरी उसी के  एक रिश्तेदार ने की थी। संदीप के दोनों साथी फरार बताए जा रहे हैं।
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तीन ऑटोलिफ्टर से पांच बाइक बरामद
सिसैया में पकड़े गए तंबौर के संदीप वर्मा, बट्टू उर्फ नसीम और जियायुद्दीन से पूछताछ के बाद धौरहरा कोतवाल नंदजी यादव ने कस्बा निवासी साजिद, इरफान और प्रताप सिंह को गिरफ्तार किया है। इनकी निशानदेही पर अलग-अलग जगहों से चोरी की गईं पांच बाइक को पुलिस ने बरामद किया है। पूछताछ में पता चला है कि तीनों आरोपी गिरोह के लीडर सलीम के लिए काम करते थे। एक बाइक चोरी करने पर सलीम से तीनों को पांच हजार रुपये मिलते थे। चोरी की गई बाइक को घर में छिपाने के एवज में प्रताप को एक हजार रुपये अतिरिक्त मिलता था।
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