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अवैध रूप से चल रहे दो बूचड़खानों पर ताला 

Tue, 21 Mar 2017 11:00 PM IST
लखीमपुर, ब्यूरो
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अवैध रूप से चल रहे दो बूचड़खानों पर ताला  - फोटो : अमर उजाला
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खीरी टाउन और धौरहरा के रामनगर लहबड़ी में हुई कार्रवाई
बगैर लाइसेंस के राजनीतिक संरक्षण में चल था रहा कारोबार
 प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ ही अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मंगलवार को पुलिस-प्रशासन ने खीरी टाउन और धौरहरा के रामनगर लहबड़ी में चल रहे बूचड़खानों को सीज कराया है। दोनों ही जगहों पर राजनीतिक संरक्षण में बूचड़खाने चल रहे थे, क्योंकि रामनगर लहबड़ी में लाइसेंस ही जारी नहीं हुआ था। जबकि खीरी टाउन के बूचड़खाने को 2013 में ही बंद करने का आदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जारी कर चुका था।
खीरी टाउन। कस्बे में दशकों पुराने बूचड़खाने को सीज करने मंगलवार को नगर पंचायत के अधिशाषी अधिकारी दिनेश कुमार मिश्रा और सदर कोतवाल दीपक शुक्ला पुलिस बल के साथ बूचड़खाने पर पहुंचे। मांस कारोबारियों ने पहले विरोध किया। इसके बाद ईओ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश का हवाला देते हुए बूचड़खाने के मेन गेट और टूटी दीवारों पर तार और बांस लगा कर सीज कर दिया है। इस कार्रवाई के दौरान मांस कारोबारियों ने बूचड़खाने को बंद कराने का आदेश मांगा, जिस पर ईओ ने 27 नवंबर 2013 को जारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आदेश दिखाया। जबकि इसके बाद से 23 लोगों को नगर पंचायत ने मवेशियों को मारने का लाइसेेंस जारी रखा है। ईओ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति मिलने के बाद ही बूचड़खाना संचालन कराने का आश्वासन दिया है। कार्रवाई में देरी की बावत संतोषजनक उत्तर देने के बजाय ईओ ने कहा है कि अभिलेखों में कमी पाए जाने के कारण इसे सीज करते हुए बंद कराया गया है। इस दौरान एसओ जावेद अख्तर, राजापुर चौकी इंचार्ज, नायब तहसीलदार मौजूद रहे।
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धौरहरा। कोतवाली क्षेत्र के रामनगर लहबड़ी में जिला पंचायत से अनुमति न मिलने के बावजूद बूचड़खाना चलाया जा रहा था, जिसे मंगलवार को कोतवाल रामजी चौधरी ने भारी पुलिस के साथ मौके पर जाकर सीज कर दिया है। रामनगर लहबड़ी निवासी हसन मोहम्मद ने अगस्त 2007 में बफैलो स्लाटर हाउस के लिए जिला पंचायत में आवेदन किया था, जिस पर जिला पंचायत ने ग्रामीण इलाके में स्लाटर हाउस का बायलाज न होने का हवाला देते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद राजनीतिक संरक्षण में यहां अन्य पशुओं के अलावा प्रतिबंधित पशुओं का वध किया जाता रहा है। योगी राज आते ही पुलिस-प्रशासन ने सरकार की प्राथमिकता को देखते हुए कार्रवाई की गई है। हालांकि अधिकारी कुछ भी अधिकारिक बयान देने से बच रहे हैं। कोतवाल रामजी चौधरी ने बताया कि बूचड़खाने के कागजातों का निरीक्षण कि या गया, लेकिन पुराने स्थगन के अलावा कोई वैध कागजात नहीं मिले हैं। इसके चलते बूचड़खाने को बंद करा दिया गया है। उधर, एसडीएम धौरहरा आलोक वर्मा ने कहा कि बूचड़खाना को बंद कराने का मामला संज्ञान में आया है। कार्रवाई की बावत कोई अलग से निर्देश नहीं दिए गए थे।
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और जवाब देने में चुप्पी साध गए अफसर
लखीमपुर खीरी। सालों से जिले में अवैध रूप से चल रहे बूचड़खानों पर भाजपा सरकार बनने के बाद कार्रवाई हुई है। इसको लेकर अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। बगैर लाइसेंस के इनके संचालन की बावत अफसर कोई अधिकारिक बयान देने में खुद को असहज पा रहे हैं। यही वजह है कि दोनों जगह कार्रवाई के दौरान प्रशासन की ओर से कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। प्रदेश के कई जिलों में बूचड़खानों को बंद करने की कार्रवाई होने के बाद यहां संचालित अवैध बूचड़खानों की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। लिहाजा प्रशासन के निर्देश पर पुलिस को बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी। हालांकि प्रशासन के आला अफसर इस बावत अभी कोई अधिकारिक बयान नहीं दे रहे हैं, क्योंकि कई सालों तक कार्रवाई न किए जाने से अफसर भी सवालों के घेरे में हैं। 
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