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झोलाछाप डॉक्टर ने ली युवती की जान

Sun, 10 May 2015 11:16 PM IST
निघासन
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गांव बरोठा के रामेश्वर की 18 वर्षीय बेटी पूनम की झोलाछाप डॉक्टर ने जान ले ली। डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही उसकी तबीयत बिगड़ गई और थोड़ी देर बाद उसने दम तोड़ दिया। युवती की हालत बिगड़ते देख झोलाछाप डॉक्टर वहां से खिसक लिया। कार्रवाई से इनकार करने पर पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया और उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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पिता रामेश्वर के अनुसार उनकी बेटी फेफड़ों की परेशानी से पीड़ित थी। यहां के डॉक्टरों से वह ठीक नहीं हुई तो उसे लखनऊ में दिखाया गया। डॉक्टर ने दवाइयों के साथ पेनीडियोर 12 लाख इंजेक्शन दो दिन बाद किसी भी अस्पताल से लगवाने को कहा था। इस पर रविवार की दोपहर बाद गांव के ही एक डॉक्टर से इंजेक्शन लगवाया। हाथ में इंजेक्शन लगते ही पूनम की हालत बिगड़ने लगी। पिता के अनुसार पांच मिनट भी नहीं बीते और उसने दम तोड़ दिया। मौत की जानकारी लगते ही घर के लोग रोने बिलखने लगी। युवती की मां शांती एक ही बात कह-कहकर रो रही थी कि इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल ले जाते तो बिटिया की जान नहीं जाती।
एसओ-निघासन अनिल शाही ने बताया कि लापरवाही से इंजेक्शन लगाने से युवती की मौत की सूचना पर पुलिस र्गई थी, लेकिन परिवार वालों ने बीमारी से मौत की बात कहते हुए किसी भी कार्रवाई से इनकार कर दिया। फिर भी शव का पंचनामा भरवाकर उनकी सुपुर्दगी में दिया गया है।
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बिना जांच के नहीं लगना चाहिए था इंजेक्शन
जिला अस्पताल के इमर्जेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. अमित सिंह ने बताया कि पेनीडियोर इंजेक्शन के रिएक्शन से हार्ट तत्काल कार्य करना बंद कर देता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है। इसे मरीज की त्वचा पर बिना जांच के नहीं लगाना चाहिए था। जांच के बाद यदि रिएक्शन न करे तो उसेे कमर में लगाया जाता है। हाथ में लगाने की प्रक्रिया ही गलत है।
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इन बीमारियों में लगाया जाता है यह इंजेक्शन
डा. अमित सिंह के अनुसार, यह इंजेक्शन, हार्ट डिजीज, फेफड़े और श्वसन तंत्र के अलावा कई अन्य बीमारियों में तीव्र एंटीबायोटिक के रूप में दिया जाता है।

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