टूटी-फूटी झोपड़ी, छप्पर के अंदर से दिखता खुला आसमान। यह हालात है अदलाबाद के एक दलित परिवार की। यहां पर गरीबी और इलाज के अभाव में एक किशोरी ने दम तोड़ दिया जबकि अन्य दो किशोरी बीमार हैं। पैसे न होने के कारण वह परिवार ओझा और तांत्रिक से झाड़ फूंक करा रहा है।
कस्बे से आठ किलोमीटर दूर वीरो देवी का एक खुशहाल परिवार था। जमीन न होने के कारण पति स्वामीनाथ और उसकी पत्नी वीरो देवी अपने बच्चों फूलकुमारी, राजकुमारी, ओमकुमारी, शैलकुमारी और मनोरोगी बेटा बिहारी की परवरिश के लिए मेहनत मजदूरी करते हैं। मां-बाप का सहयोग उसकी बड़ी बेटी फूलकुमारी करती थी। करीब तीन साल पहले स्वामीनाथ की बीमारी के चलते मौत हो गई। उसके बाद मजदूरी करते करते वीरो देवी भी कमजोर पड़ गई। खाना समय से न मिलने के कारण उसकी पुत्री फूलकुमारी, राजकुमारी, ओमकुमारी और शैलकुमारी बीमार हो गई। शैलकुमारी की लंबी बीमारी के चलते सोमवार को मौत हो गई। अन्य पुत्रियां घर के अंदर जिंदगी और मौत से जूझ रही है। पैसे के अभाव में वह गांव में झाड़ फूंक करने वाले तांत्रिक के पास जाकर बेटियों को बचाने की गुहार लगा रही हैं।