- बकायेदारी के विवाद में ग्रामीण को मारा था चाकू
- कई बार हुई थी कहासुनी, पंचायत में हुई थी सुलह
बकायेदारी के विवाद में ग्रामीण युवक को चाकू घोंपकर मौत के घाट उतारने के मामले में एडीजे हाजी अशरफ अंसारी ने हत्याभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने हत्याभियुक्त पर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि थाना खीरी के ग्राम भनवापुर मजरा बसैगापुर निवासी अंगद लोनिया ने उल्ल नदी के कुछ क्षेत्र में मछली पकड़ने का ठेका लिया था। इस ठेके में गांव का ही मोलहे कहार भी साझेदार था। मोलहे के साथ उसका दामाद किच्छा उधमसिंह नगर निवासी राकेश भी हाथ बंटाने लगा। इसी बीच अंगद से राकेश का व्यवहार अच्छा हो गया और दोनों के बीच रुपयों के लेनदेन होने लगा। धीरे-धीरे राकेश पर जब उधारी की बकाया रकम ज्यादा हो गई तो उससे अंगद की कई बार कहासुनी भी हुई थी, लेकिन गांव के लोगों ने पंचायत में सुलह करा दी थी। आरोप है कि राकेश इसी बात को बेइज्जती मानकर अंगद से बदला लेने की तलाश करने लगा 16 जून 2010 की दोपहर अंगद लोनिया को लेकर राकेश बसैगापुर जाने लिए चल दिया। खबर लगते ही अंगद की पत्नी नंदरानी अपने बेटे अट्टू को साथ लेकर पति को बुलाने के लिए पीछे-पीछे चल दी। आरोप है कि जैसे ही रामलखन के खेत के पास पहुंचे तभी राकेश ने चाकू से अंगद लोनिया पर ताबड़तोड़ हमला कर मरणासन्न दिया। पत्नी नंदरानी और पुत्र अट्टू ने ललकारते हुए पीछा किया तो हत्याभियुक्त भाग निकला। परिजन और ग्रामीण अंगद को इलाज के लिए जिला मुख्यालय लाने की तैयारी करने लगे तभी उसने दम तोड़ दिया। तत्कालीन एसओ नितिन कसाना ने अगले दिन ही मानव रक्त लगे चाकू के साथ राकेश को गिरफ्तार कर लिया। अदालती सुनवाई के दौरान नंदरानी, अट्टू, शिवशंकर पटेल, रामविलास, डा.अखिलेश खरे की गवाही पेश हुई। अदालत ने सुनवाई के बाद राकेश को दोषी पाते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है।