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किसानों की मेहनत रौंद रहे हाथी

Thu, 14 Jul 2016 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/पलियाकलां/संपूर्णानगर (लखीमपुर खीरी)।
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elephent - फोटो : amar ujala
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कई इलाकों में निकले हाथियों के झुंड रौंद रहे फसल, कर रहे लोगों पर हमला 
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बसही में भी एक किसान को किया जख्मी
मझर्गई में सैकड़ों एकड़ फसल तहसनहस
वन विभाग की चुप्पी से गुस्से में ग्रामीण 
धान की रोपाई के बाद के सीजन में इलाके में जंगली हाथियों का कहर बढ़ गया है। हाथियों के झुंड आए दिन खेतों को रौंद रहे हैं। गुरुवार को हाथियों ने बसही में भी एक ग्रामीण को जख्मी कर दिया। मझगई में सैकड़ों एकड़ फसल तहसनहस कर दी वहीं प्रताप नगर में एक किसान का झाला रौंद दिया। वन विभाग चुप्पी साधे बैठा है और ग्रामीणों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 
बसही गांव के मजरा बनटोला निवासी मंगरू को गुरुवार सुबह जंगली हाथियों ने जख्मी कर दिया। मंगरू खेतों की ओर गए थे। प्रताप नगर गांव में भी अलसुबह जंगली हाथियों का एक झुंड दिखाई दिया। उसे देख तमाम लोग छिप गए। हाथियों ने यहां प्रेम का झाला तहस नहस कर दिया। उधर मझगईं संवाददाता के अनुसार छब्बापुरवा निवासी पूर्व प्रधान लियाकत खां, बनवारी, चंद्रिका, रघुवीर, रामस्वरूप, बनारसी, रामऔतार, बशारत खां, निंरजन, दौलतराम, सीताराम, पुत्तू आदि किसानों के खेत गांव के उत्तर हैं। इसमें खड़ी करीब 20 एकड़ गन्ने की फसल जंगली हाथियों ने तहसनहस कर दी। किसानों ने इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। अन्य गांवों में हाथी खेतिहर इलाके को तहसनहस कर रहे हैं। 
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इससे पहले भी जानें ले चुके हैं जंगली हाथी 
पलियाकलां। जंगली हाथी इससे पहले भी जानें ले चुके हैं। चंदनचौकी में हाथियों के झुंड में से एक हाथी ने खेत की रखवाली कर रहे एक थारू किसान को मचान से गिराकर मार डाला था। गजरौरा गांव में भी वर्षों पूर्व जंगली हाथी ने एक व्यक्ति को मौत के घाट उतार दिया था।
आदिवासी थारू जनजाति क्षेत्र के गांव बजाही के खेतिहर इलाके में नौ मार्च को तबाही मचा रहे जंगली हाथियों के एक झुंड को जब रखवाली कर रहे ठग्गन पुत्र सुमला ने टार्च की रोशनी दिखाई तो एक हाथी उनकी मचान के पीछे पड़ गया और उन्हें मचान से नीचे गिराकर पटक पटककर मार डाला था। इससे पूर्व वर्ष 2008 में जंगली हाथी ने गजरौरा गांव में एक व्यक्ति की जान ले ली थी। दुधवा रेलवे स्टेशन और परिसर भी हाथियों द्वारा कई बार क्षतिग्रस्त किए जा चुके हैं। दुधवा गौरीफंटा मार्ग और दुधवा चंदनचौकी मार्ग पर कई वाहनों को जंगली हाथी कुचल चुके हैं। सवारों ने जैसे तैसे जान बचाई थी। वन महकमे के पास इनको रोकने के लिए सिर्फ बचाव ही हथियार है और इसके लिए वह गांवों में हाथी बचाव दल का गठन करता है। उन्हें उपकरण, गोला आदि मुहैया कराता है लेकिन कई बार जंगली हाथी इन बचाव दलों के लिए भी भारी पड़ जाते हैं।
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एक हाथी अपने झुंड से अलग घूम रहा है। इसकी स्थिति पागल होने वाली लग रही है। जो भी सामने आ रहा है, उसे तहसनहस कर रहा है। टीमों को सतर्क किया गया है। बसही, मझगई में इसी हाथी ने उत्पात मचाया है। वहीं सुरक्षा की बात करें तो जंगल में इतने बड़े पैमाने पर फेंसिंग तो नहीं की जा सकती है लेकिन जंगली जीव प्रभावित इलाकों में फसल और जानमाल बचाने के लिए फसल बचाओ दल का गठन कर उन्हें प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये दल जानवरों का मूवमेंट बदल देते हैं। इन दलों के बारे में प्रसार प्रचार किया जा रहा है। 
- राधेश्याम भार्गव, सहायक परियोजना अधिकारी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ 
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