अतिरिक्त दहेज की मांग के चलते विवाहिता को जहर देकर मार डालने के मामले में एडीजे तृतीय की अदालत ने पति और उसके भाई को दोषी साबित पाया है। जिन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई है। वहीं दहेज उत्पीड़न के मामले में सास और पति के तीसरे भाई को दोषी पाए जाने पर पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष के एडीजीसी रमेश प्रसाद गुप्ता ने बताया कि शहर के मोहल्ला शमशेरनगर निवासी शकरून्निशा ने अपनी पुत्री नसरीन का निकाह सन 2001 में मोहम्मद शफी खां के साथ किया था। आरोप है कि निकाह में दहेज के रूप में जीप की मांग करते हुए यह तय हुआ था कि सउदी अरब से लौटने पर शफी खां को जीप दी जाएगी। मई 2003 में शफी खां अपनी पत्नी नसरीन और बच्चे को लेकर लखीमपुर लौटा, इसी बीच 13 जून 2003 को नसरीन को डॉक्टर के पास दिखाने के बहाने ले गए और उसे कोई विषैला पदार्थ पिला दिया। इससे नसरीन की मौत हो गई। एडीजीसी रमेश गुप्ता ने बताया कि मामला साबित करने के लिए अभियोजन की ओर से शकरून्निशा, डॉ.केसी वर्मा, रूकैय्या, सीओ आरके सिंह, नायब तहसीलदार देश दीपक सिंह की गवाही दर्ज कराई और बचाव पक्ष की कोई दलील नही लगने दी। अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए पति मोहम्मद शफी व उसके भाई मोहम्मद वसी को हत्या के लिए दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही दोनों पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है जबकि आरोपी सास कुबरा और देवर नबी उर्फ नन्हें को दहेज की मांग के मामले में दोषी पाते हुए पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका है।
अदालत ने दिए रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश
लखीमपुर खीरी। ईसानगर थाना क्षेत्र के ग्राम हसनपुर कटौली निवासी सोहनलाल ने कोर्ट में अर्जी देते हुए बताया कि उसके लड़के संतोष कुमार की गांव में ही पान की दुकान थी। आरोप है कि तीस हजार रुपये के लेन देन के विवाद में 12 मई 2015 को संडौरा खुर्द निवासी धन्नी व मूलचंद्र ने ग्राम डेबर निवासी जगमोहन की मदद से संतोष को पेप्सी में जहर मिलाकर हत्या कर दी। एसीजेएम कोर्ट में अर्जी पर बहस करते हुए लियाकत अली सिद्दीकी ने इसे गंभीर मामला बताया, इस पर एसीजेएम राहुल प्रकाश ने ईसानगर पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।