दुधवा नेशनल पार्क में वन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से कटान होती है और नेपाल की आरा मशीनों पर इन्हें चीरा जाता है। यह खुलासा एसडीएम पलिया प्रमिल कुमार सिंह द्वारा डीएम को भेजी गई रिपोर्ट से हुआ है। उन्होंने रिपोर्ट में मौके के वीडियो और फोटो की सीडी भी संलग्न की है। इधर डीएम किंजल सिंह ने पार्क क्षेत्र में अवैध कटान की रिपोर्ट मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि अभी रिपोर्ट का अध्ययन नहीं किया है, इसलिए इस मामले में कुछ कह नहीं सकतीं।
एसडीएम पलिया की रिपोर्ट के अनुसार थारू क्षेत्र के ग्रामीणों से मिली शिकायत के आधार पर वन क्षेत्र में अवैध कटान की जांच में पता चला है कि दुधवा से लगभग 25 किलोमीटर दूर गांव जयनगर में 115 पेड़, दुधवा से 28 किलोमीटर दूर गांव नझोटा के पास वनकटी क्षेत्र में 112 पेड़, भारत नेपाल सीमा पर गौरीफंटा के पास पिलर संख्या 171 से 173 के बीच 140 पेड़ और दुधवा से 25 किलोमीटर दूर गांव मशानखंभ के पास 22 पेड़ों का अवैध कटान हुआ है। सभी पेड़ शीशम और साखू (साल) के है। रिपोर्ट के मुताबिक सभी पेड़ों को देखने से लगता है कि उन्हें काटने के बाद मिट्टी का लेप लगा दिया गया है, जिससे देखने से यह लगे कि पेड़ काफी पुराने कटे हैं। जांच के समय 22 गांव वालों के बयान लिए गए, जिसमें यह बात पता लगी कि पेड़ को काटने के बाद भूमि पर अवशेष कटे भाग पर कुछ केमिकल डाल दिया जाता है, जिससे यह कटा भाग पुराना दिखने लगता है।
नेपाली ठेकेदारों से कटवाते हैं पेड़...
वन क्षेत्र के पेड़ों का अवैध कटान नेपाली ठेकेदारों से कराया जाता है और वन विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के सहयोग से नेपाल की आरा मशीनों तक ले जाया जाता है। विभाग की कारगुजारी छिपाने के लिए निर्दोष ग्रामीणों को जुर्माने और मुकदमे में फंसा दिया जाता है। जांच में यह भी पाया गया है कि थारू जनजाति के ग्रामों के पास ही इन पेड़ों का कटान किया गया है। मौके पर मौजूद अवशेष कटे भाग पर नंबरिंग कर दी गई है।
कुछ पेड़ दो महीने के अंदर काटे गए
जांच में यह बात साफ तौर पर लिखी गई है कि कुछ पेड़ हाल के दो महीने के अंदर काटे गए प्रतीत होते हैं। काटे के सभी पेड़ बेशकीमती हैं। ऐसा लगता है कि चुन चुनकर काटे गए हैं।
रिपोर्ट में एसडीएम ने जताई चिंता, उठाए सवाल
एसडीएम ने रिपोर्ट में कहा है कि इतने व्यापक पैमाने पर कटान क्षेत्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता के बिना संभव नहीं है, जो वन संपदा की सुरक्षा के लिए चिंतनीय है। उन्होंने लिखा है कि उचित होगा कि सक्षम स्तर से कटान के संबंध में व्यापक समीक्षा की जाए। यह भी देखा जाए कि सभी पेड़ों के संबंध में प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है या नहीं। चूंकि यह भी पता चला है कि ऐसे मामलों को अज्ञात में दर्ज कर इतिश्री कर ली जाती है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया है कि बड़े पैमाने पर कटान होने से पेट्रोलिंग की ही नहीं जा रही है अथवा वन अपराधियों को मौका दिया जा रहा है।