अब तक हो चुकी है 24 बच्चों की मौत
जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में बेहोशी की हालत में लाई गई दो वर्षीय बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस तरह बुखार से 24 बच्चों की जान जा चुकी है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में बुखार पीड़ित सिर्फ एक बच्चे की ही मौत हुई है। उधर संभावित एईएस (एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम) पीड़ित पांच बच्चों की हालत नाजुक होने के कारण इन्हें आईसीयू वार्ड के लिए रेफर कर दिया गया है और इन बच्चों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।
चिल्ड्रन वार्ड में दो वर्षीय सोनी पुत्री अजय शर्मा निवासी करियाना टोला को बेहोशी की हालत में गुरुवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया, जिसे तीन बजे चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती करा दिया गया। उपचार के दौरान रात करीब नौ बजे सोनी की मौत हो गई। वहीं सात वर्षीय मुस्कान पुत्र सलीम निवासी खरबरिया, चार वर्षीय राजवीर पुत्र लेखराम निवासी कुकैना, दस वर्षीय नीरज पुत्र किशोरी लाल निवासी निघासन, दस वर्षीय शिवानी पुत्री राकेश निवासी मूड़ाखुर्द, आठ वर्षीय रहीम पुत्र अशरफ निवासी देउवापुर, पांच वर्षीय सत्यम पुत्र श्यामू निवासी राजपुर, छह वर्षीय अल्तमश पुत्र अजीज निवासी निघासन, पांच वर्षीय शुभम पुत्र संजय निवासी बरखेरवा को बुखार आने पर भर्ती कराया गया। इन बच्चों में एईएस की संभावना व्यक्त की जा रही है। डॉक्टरों ने इन बच्चों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।
आईसीयू में भर्ती बच्चों की संख्या हुई सात
शुक्रवार को चिल्ड्रन वार्ड से पांच बच्चों को आईसीयू के लिए रेफर किया गया है, जिससे अब वहां पर भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या सात हो गई है। शुक्रवार को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती सात वर्षीय मुस्कान पुत्र सलीम निवासी खरबरिया, चार वर्षीय राजवीर पुत्र लेखराम निवासी कुकैना, दस वर्षीय नीरज पुत्र किशोरी लाल निवासी निघासन, दस वर्षीय शिवानी पुत्री राकेश निवासी मूड़ाखुर्द, आठ वर्षीय रहीम पुत्र अशरफ निवासी देउवापुर की हालत में सुधार न होने कारण इन सभी बच्चों के सैंपल लेकर इन्हें आईसीयू के लिए रेफर कर दिया गया है। जबकि छह वर्षीय शिवानी पुत्री अरविंद कुमार, निवासी सलेमपुर कोन और पांच वर्षीय उपासना पुत्री सर्वेश निवासी सखनऊ पहले से वहां पर उपचार चल रहा है।
बुखार का डंक, स्वास्थ्य विभाग अपंग
लखीमपुर खीरी। बेकाबू बुखार से लोगों की जान पर बनी है और अफसर अनजान बने हुए हैं। बुखार से होने वाली मौतों का आंकड़ा 24 पहुंच गया है, लेकिन सरकारी रिकार्ड मेें जेई अथवा एईएस से कोई मौत नहीं हुई है। बरेली, लखनऊ, दिल्ली में इलाज को जा रहे लोग दम तोड़ रहे है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग लापरवाह नजर आ रहा है।
सरकार करोड़ों रुपये खर्च करके चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रही है, लेकिन धरातल पर चिकित्सा व्यवस्थाएं ठप हैं। जिले में सीएचसी, न्यू पीएचसी, ब्लॉक लेबिल पीएचसी, सब सेंटर, आशाएं और एएनएम कार्यरत है। इतने संसाधन होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा धरातल पर चिकित्सा सेवाएं देने में नाकाम नजर आ रहा है। बुखार से लगातार मौतें होने के बाद भी इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पुख्ता इंतजाम नहीं है। फिलहाल बुखार के डंक से निपटने के दावे हवाई हैं। ऐसे में आम आदमी 'बेचाराÓ बना नजर आ रहा है। वह समझ ही नहीं पा रहा है। कि आखिर में यह क्या हो रहा है? बेचारी बनी, जनता अफसरों का मुंह ताक रही है। मानों पूछ रही हो कि आए दिन जीवन लीलने वाले इस बुखार को क्या नाम दें।
तेज बुखार इन 24 बच्चों की गई जान
जिला अस्पताल में संभावित जेई से पीड़ित मरने वाले बच्चों का आंकड़ा 24 तक पहुंच चुका है। जबकि जिला अस्पताल प्रशासन इन बच्चों की मौत जेई एवं एईएस से होने से इनकार कर रहा है । जिला अस्पताल के आंकड़ों में अभी तक एक भी मौत जेई एवं एईएस से नही हुई है। जबकि पायल (4) पुत्री प्रदीप निवासी ईसानगर, सुनैयना (7) पुत्री राम गोविंद गुप्ता निवासी जेबीगंज, सुआलली(5) पुत्री रामप्रसाद निवासी लालपुरवा और विशाल(10), शिवानी(1), कामिनी(2), ममता(12), निशां (11), गुड़िया(4), लज्जी कौर (4), दीपक (3), विनोद (4), अल्शफा (5), अंशुमन (1), प्रीति (10), आदर्श (7 ) एवं गंगाराम, शिवानी, सिमरन, शिवम, शैलेंद्र , पंक्षी, काजल और राजलक्ष्मी की मौत हो चुकी है।
डेंगू के लक्षण
तेज बुखार, तेज बदन दर्द, जोड़ों में दर्द, आंखों के गोले में दर्द, शरीर में दाने/चकत्ते आदि। प्लेटलेट्स एक लाख से कम हो जाएं।
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मलेरिया के लक्षण
तेज सर्दी के साथ बुखार आना, सिर व बदन दर्द, भूख न लगना। तीसरे या पांचवे दिन बुखार का आना, बेहद कमजोरी का अहसास होना। यशोचित उपचार होने तक यह बुखार रहता है।
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टॉयफाइड के लक्षण
सामान्य लेकिन लगातार रहने वाला बुखार, भूख न लगना, चक्कर आना, सिर व बदन दर्द होना। पेट दर्द व पीठ दर्द की भी शिकायत होना।
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वायरल के लक्षण
तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर टूटना, भूख न लगना, कमजोरी का ंअहसास होना, तेज पसीना आना। पांच से सात दिन तक रहता है।
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संभावित एईएस पीड़ित बच्चों के सैम्पल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी की स्थित स्पष्ट हो सकेगी।
-डॉ.आरके वर्मा, बाल रोग विशेषज्ञ
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हो रहा छिड़काव
सीएमओ डॉ.जावेद अहमद का कहना है मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए बाढ़ प्रभावित गांवों के लिए टीमें पहले ही गठित कर दी गई थीं। अभी तक तेरह गांव इसकी चपेट में आए हैं। इन सभी गांवों में टीमें इलाज कर रही हैं। गांवों में ब्लीचिगं पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है।