लखीमपुर खीरी। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह खर्च कर दिए, फिर भी गांवों में ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। गांवों में शौचालय निर्माण में घोटाले के भी कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें कार्रवाई करने में भी तत्कालीन डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव हीला-हवाली करते थे। हालात इस कदर खराब हो चुके थे कि सीडीओ की नोटिस का भी वह जवाब नहीं देते थे। पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत खूंटी बुजुर्ग की प्रधान के पति/सफाईकर्मी की भी उसी के गांव में तैनाती कर रखी थी, जो गांव में सफाई करने के बजाय प्रधानी चलाता था। इसी के चलते बुधवार की शाम को शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया।
जनपद में 717155 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है, जिसके सापेक्ष अब तक 714925 शौचालय बनाने का दावा किया जा रहा है। प्रत्येक शौचालय पर 12 हजार रुपये सरकार खर्च कर रही है, जिसके हिसाब से आठ अरब 60 करोड़ 58 लाख 60 हजार रुपये ग्राम पंचायतों को शौचालय निर्माण के लिए दिए गए हैं। जबकि इसके अलावा प्रचार-प्रसार और संविदा पर रखे गए स्टाफ के मानदेय आदि में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। नकहा ब्लॉक की ग्राम पंचायत पटना और बेलवा में शौचालय निर्माण में घोटाले किए जाने के चलते ग्राम पंचायत अधिकारी और प्रधान पर कार्रवाई हो चुकी है। हाल में ही डीएम ने मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत रावन कला की प्रधान को शौचालय न बनवाने पर नोटिस दिया था। ऐसे ही कई अन्य मामले हैं, जिससे सरकार की किरकिरी हो रही है। शौचालयों पर अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद महिलाएं खेतों में जाने का मजबूर हैं। एनएचआरसी ने कुछ दिन पहले ईसानगर क्षेत्र में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की थी, जिसमें गांवों में अधूरे पड़े शौचालय का जिक्र करते हुए रिपोर्ट मांगी गई। इस पर अमर उजाला ने कुछ गांवों में शौचालयों का जायजा लेकर खबर प्रकाशित की थी, तो कई गांवों में अधूरे पड़े शौचालयों में कंडा/भूसा भरा मिला था।
कमिश्नर भी जता चुके थे नाराजगी
डीपीआरओ के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा दिन पर दिन बढ़ता चला गया। विभागीय कार्यों में लगातार लापरवाही, उदासीनता बरतने और भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई न करने के चलते सीडीओ अरविंद सिंह ने कई बार डीपीआरओ को नोटिस दी और जवाब न देने पर प्रतिकूल प्रविष्टि दी थी। फिर भी डीपीआरओ की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया, बल्कि वह अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहे। नतीजतन नोडल अधिकारी/कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने जुलाई 2020 में जनपद के दौरे के दौरान तत्कालीन डीपीआरओ को फटकार लगाई थी और प्रतिकूल प्रविष्टि दी थी। इससे पहले सीडीओ ने पंचायत राज विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर डीपीआरओ को हटाए जाने की मांग करते हुए गांवों में शौचालय निर्माण की खराब स्थिति के बारे में रिपोर्ट दी थी।
डीपीआरओ के खिलाफ यह है आरोपों की पुलिंदा
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने डीपीआरओ अजय कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ लगे आरोपों की फेहरिस्त में बताया है कि पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया है। लापरवाही, उदासीनता, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने, नोडल अधिकारी के दौरे के दौरान बिना अवकाश स्वीकृत कराए मुख्यालय छोड़ना, शौचालय निर्माण में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई न करना, बीडीओ बेहजम की जांच में दोषी पाए गए ग्राम पंचायत अधिकारी दिलीप गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई न करने जैसे गंभीर आरोपों से भी डीपीआरओ घिरे हैं।