तिकुनियां। उच्च न्यायालय के आदेश पर ग्राम पंचायत बरसोला कलां में अब्दुल करीम की जमीन पर बने 70 से अधिक परिवारों के मकान ढहाने पहुंची प्रशासन-पुलिस की टीम को एक बार फिर बैरंग लौटना पड़ा। शनिवार दोपहर टीम के पहुंचते ही दहशतजदा परिवार न्याय मांगते हुए हाथों में तख्तियां लेकर सामने आ गए और फिर टीम को आगे बढ़ने से रोकने के लिए जेसीबी मशीन के आगे लेट गए। कई घंटे तक मशक्कत के बावजूद जनाक्रोश के आगे अधिकारियों की एक नहीं चली।
17 अगस्त को विरोध के बाद इस बार प्रशासन अधिक तैयारी की थीं। कोतवाली तिकुनियां में शनिवार को पूर्वाह्न 11 बजे एसडीएम ओपी गुप्ता, सीओ राकेश नायक, तहसीलदार धर्मेंद्र पांडेय समेत पलिया, तिकुनियां, धौरहरा, चंदनचौकी और ईसानगर थानों की पुलिस फोर्स एकत्र हुई। कब्जा कटाने के लिए जेसीबी का इंतजाम किया गया। कोतवाली से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित बरसोला कलां ग्राम के बगिया मोहल्ला में पहुंचने को टीम तैयार ही थी कि अचानक एसडीएम और तहसीलदार बेलरायां कस्बा के क्लेशहरण चौराहा पर अतिक्रमण हटवाने चले गए। इधर गांव के लोग दहशत के साए में पल-पल प्रशासनिक अमले पर टकटकी लगाए थे। करीब 2:30 बजे जेसीबी के साथ एसडीएम और सीओ भारी दल बल के साथ गांव पहुंचे, जहां अपने मकान के सामने पीड़ितों की पूरी भीड़ पहले से ही हाथों में तख्तियां लेकर जमा थी। तख्तियों में लिखा था ‘हमें न्याय चाहिए, हमें हिसाब चाहिए’। एसडीएम द्वारा समझाने के बावजूद पीड़ित टस से मस नहीं हुए। इस दौरान कार्रवाई को देखने के लिए गांव में भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। करीब एक घंटे तक बातचीत और ग्रामीणों को हटाकर न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने के लिए प्रशासन जुटा रहा। लोगों के भारी विरोध के चलते जेसीबी आगे पीछे होती रही। जैसे ही जेसीबी आगे बढ़ती पीड़ित महिला, पुरुष और बच्चे ‘वापस जाओ’ नारा लगाकर आगे आ जाते, तो कुछ लोग लेटकर विरोध जताने लगते। काफी लोग अपने घरों की छतों पर इकट्ठे होकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई देखते रहे। लोगों के जबरदस्त विरोध के आगे प्रशासन की एक नहीं चली। करीब चार बजे थक-हारकर अधिकारी टीम सहित वापस कोतवाली लौैट गए।