फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलीगढ़ से मटेहिया पैदल पहुंचे सोनेलाल

विज्ञापन
विज्ञापन
गुलरिया (लखीमपुर खीरी)। भीरा थाना क्षेत्र के मटेहिया निवासी 30 वर्षीय सोनेलाल 12 मार्च को अलीगढ़ मजदूरी करने गए थे, इस दौरान लॉकडाउन के कारण फंस गए, मजबूरन 300 किमी की पैदल सफर कर घर वापस आए हैं।
विज्ञापन

सोनेलाल बताते हैं कि वह जिस फार्म पर मजदूरी करते थे मालिक ने 14 अप्रैल तक खाना पानी दिया। सोचा लॉकडाउन खुलने पर काम करवा लेंगे लेकिन लॉकडाउन की अवधि आगे बढ़ जाने पर खाना पानी देना बंद कर फार्म से चले जाने को कहा। सोनेलाल ने काफी खुशामद की लेकिन मालिक नहीं पसीजा। सोनेलाल के पास सिर्फ पांच सौ रुपये थे। अपने कपड़ों का बैग पीठ पर टांगा। रविवार की सुबह पैदल ही घर के लिए रवाना हो लिए। 300 किलोमीटर का सफर तीन दिन तीन रात में तय करने के बाद बुधवार सुबह दस बजे अपने गांव पहुंचे और गांव के बाहर रुककर ग्राम प्रधान इंद्रजीत सिंह को सूचना दी। प्रधान ने सोनेलाल के परिजन को बुलाकर दूर से बातचीत कराई और सोनेलाल को प्राथमिक विद्यालय में बने क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया। सोनेलाल के भोजन की व्यवस्था परिवार वाले कर रहे हैं।
लखनऊ से गांव पहुंचे युवक को किया क्वारंटीन
महेवागंज बुधवार रात जमकोहना गांव निवासी एक युवक की अचानक गांव में वापसी और उसकी संदिग्ध हालत देख लोगों को शक हुआ। ग्रामीणों ने चौकी पुलिस को खबर की। युवक के घर में दाखिल होने से पहले पहुंची पुलिस ने उसे एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेज दिया। चौकी प्रभारी पारसनाथ ने बताया कि 25 वर्षीय युवक लखनऊ में इस वक्त हॉटस्पॉट बने अमीनाबाद क्षेत्र में कहीं मजदूरी कर रहा था। 20 अप्रैल को वह पैदल गांव के लिए चला था। संवाद
विज्ञापन

घरों से मंगवाकर खा रहे खान
मझगईं कोठिया प्राथमिक स्कूल में बनाए गए क्वारंटीन केंद्र में हापुड़ से आए मजदूरों को रखा गया है। लेकिन उनको खाने आदि की सुविधा नहीं दी जा रही है। जिससे यह गरीब लोग अपने घरों से सात दिनों से खाना मंगवाकर खाने को विवश हैं।
कोठिया गांव निवासी रमेश कुमार, सुधीर कुमार, सरवन, दुर्गेश, मुन्नालाल, मिथलेश, प्रनेमसागर, सरवन, सुरेंद्र कुमार आदि लोग हापुड़ गन्ना छीलने गए थे। लॉकडाउन के चलते सभी मजदूर पैदल ही 17 अप्रैल को गांव पहुंचे थे। गांव पहुंचने पर ग्राम प्रधान को जानकारी होने पर सभी को गांव के प्राथमिक स्कूल में बने क्वारंटीन केंद्र में रखा गया था। मजदूरों का आरोप है कि केंद्र में रखने के बाद से उनका कोई पुरसाहाल नहीं है। सात दिनों से वह केंद्र में रह रहे हैं और किसी तरह से अपने घरों से खाना मंगवाकर खाने को विवश हैं। आरोप है कि अभी तक उनकी कोई जांच भी नहीं की गई है। पुलिस के डर से वह लोग घर भी नहीं जा रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें