लखीमपुर खीरी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध का असर अब जिले में निर्माण कार्यों पर साफ दिखने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों के साथ कोलतार (बिटुमिन) के दाम कम होने के बजाय लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की लागत बढ़ गई है। फरवरी में करीब 53,427 रुपये प्रति टन मिलने वाला कोलतार अब बढ़कर 88,414 रुपये प्रति टन हो गया है।
कोलतार की आपूर्ति मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के रिफाइनरी क्षेत्रों से होती है। बढ़ती कीमतों का असर सीधे जिलों तक पहुंच रहा है, जिससे निर्माण कार्यों का बजट प्रभावित हो रहा है। पुराने दाम पर टेंडर लेने वाले ठेकेदारों के लिए अब महंगे दामों पर कोलतार खरीदना घाटे का सौदा बन गया है। आयात प्रभावित होने से उपलब्धता को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
स्थिति यह है कि लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार काम रोकने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि पहले कुछ हद तक कार्य संभव था, लेकिन कीमतें लगभग दोगुनी होने से अब काम करना मुश्किल हो गया है। संगठन की ओर से समय बढ़ाने की मांग को लेकर शासन से वार्ता चल रही है।
लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता (प्रांतीय खंड) परुमेंद्र त्रिपाठी विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कोलतार की आपूर्ति में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है। दाम बढ़े हैं, लेकिन सामग्री नियमित रूप से मिल रही है और विकास कार्यों की गति पर अभी विशेष असर नहीं पड़ा है।
तकनीकी रूप से एक किलोमीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी सड़क बनाने में कई टन कोलतार की जरूरत होती है, ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर लागत पर पड़ रहा है। लखीमपुर सिविल कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार मुनाफा लगभग खत्म हो गया है और कई मामलों में नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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प्रमुख अभियंता को पत्र लिखकर राहत की मांग
एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता को पत्र भेजकर बिटुमिन की बढ़ती कीमतों पर चिंता जताई है। समिति अध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने 17 अप्रैल 2026 को भेजे पत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण दरों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है, जिससे कार्य पूरा करना कठिन हो गया है।
पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी एजेंसियां राहत दे रही हैं, लेकिन लोक निर्माण विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। समिति ने विभागीय स्टोर से तारकोल उपलब्ध कराने और कार्यों की समय सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया है, ताकि विकास कार्यों की गति बनी रह सके।
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लगातार बढ़ती दरों के कारण छोटे और मध्यम ठेकेदार सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई कार्य ठप होने की स्थिति में हैं, इसलिए कुछ समय के लिए काम बंद करने का निर्णय लिया गया है।
-नीरज कुमार, अध्यक्ष, लखीमपुर सिविल कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन
सरकार से मांग है कि मूल्य समायोजन (प्राइस एस्केलेशन) लागू कर ठेकेदारों को राहत दी जाए, ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।
- भुवन कुमार, महामंत्री, लखीमपुर सिविल कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन