लखीमपुर खीरी। महिलाओं की जिंदगी बदल रही है। जो महिलाएं कभी सिर्फ घर तक सीमित थीं। आज वही महिलाएं घूंघट से निकलकर अपने गांव व शहर का नाम रोशन कर रही हैं। लखपति दीदी योजना और महिलाओं को मिल रहे सरकारी समर्थन ने सैकड़ों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है।
ये महिलाएं अपने-अपने क्षेत्र में आर्थिक व सामाजिक बदलाव ला रही हैं। खुद के आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों को भी रोजगार मुहैया करा रही हैं। इन महिलाओं की औसतन दो से पांच लाख तक की वार्षिक आय है। निघासन के बेलरायां गांव की मीरा देवी लखपति दीदी के नाम से जानी जाती हैं। मीरा ने अपने दम पर मशरूम उत्पादन में दाम के साथ नाम कमाया है। चार साल पहले मशरूम का छोटा सा काम शुरू किया, जो अब 200 क्विंटल तक के उत्पादन पर पहुंच गया है। मीरा ने गांव की काफी महिलाओं को रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया है।
दूसरी लखपति दीदी निघासन के चखरा की माधुरी पाल हैं, जिन्होंने दूध के कारोबार में उपलब्धि हासिल की है। इन्होंने वर्ष 2021 में दूध का छोटा सा कारोबार किया था लेकिन अब इनका कारोबार पराग तक जुड़ चुका है। समूह के माध्यम से उन्होंने 52 से अधिक लोगों से दूध की खरीदारी कर पराग को सप्लाई देती हैं। उन्होंने दूध की गुणवत्ता जांच के लिए अपने घर पर मशीन भी लगा रखी है।
धौरहरा के पिपरिया की अनीता देवी काॅस्टमेटिक, पसगवां की मुकददपुर की रुचि वर्मा, फूलबेहड़ की पूनम आदि करीब 12 से 13 महिलाएं हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र में लखपति दीदी के नाम से जानी जाती हैं।
आज मेरे साथ 52 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। रोजाना 200 लीटर दूध को एकत्र कर पराग को बेचती हैं। काम तो काफी अच्छा है लेकिन दूध बिक्री का पैसा थोड़ा लेट मिल पाता है।
-माधुरी पाल, दुग्ध उत्पादन
मशरूम से आर्थिक मजबूरी मिली है। मैंने अपने यहां छोटा कारोबार शुरू किया था, जो काफी बढ़ा गया है। अब मैं सीधे थोक बिक्री करती हूं। सहालग में ज्यादा आय होती है।
-मीरा देवी, मशरूम उत्पादन
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सालाना एक लाख कमाने वाली महिला बनती हैं लखपति दीदी
डीसी एनआरएलएम जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि महिलाओं को विभिन्न रोजगार से जोड़कर उनको आर्थिक रूप से सशक्त बनाना व सालाना एक लाख या इससे अधिक इनकम करने वाली महिलाओं को लखपति दीदी कहा जाता है। इनको बिना ब्याज के ऋण दिया जाता है, ताकि वे खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। व्यवसाय से संबंधित निशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
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इस तरह से करें आवेदन
-लखपति दीदी बनने के लिए महिला की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए। उनका एनआरएलएम के स्वयं सहायता समूह की सदस्य होना जरूरी है। महिलाओं के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक खाता पासबुक, पेन कार्ड, मोबाइल नंबर भी होना चाहिए। इससे संबंधित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यालय से जानकारी ले सकते हैं।
इस तरह मशरूम उत्पादन करती हैं मीरा देवी। स्रोत : स्वंय
इस तरह मशरूम उत्पादन करती हैं मीरा देवी। स्रोत : स्वंय