लखीमपुर खीरी। जिले की तमाम समस्याओं और मुद्दों को उठाते हुए समाजवादी पार्टी ने धौरहरा के सांसद आनंद भदौरिया की अगुवाई में बुधवार को शहीद नसीरुद्दीन मेमोरियल मैदान (विलोबी) में एक दिवसीय धरना दिया। धरने में सपा नेताओं ने बदहाल विद्युत व्यवस्था, अघोषित कटौती, प्राथमिक विद्यालयों को बंद करना, खाद की क़िल्लत, कालाबाजारी, जल जीवन मिशन में व्याप्त भ्रष्टाचार समेत कई मुद्दों पर चर्चा करते हुए सरकार को घेरा। बाद में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया।
सांसद आनंद भदौरिया ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 22 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे झूठे साबित हुए हैं। नई आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा बड़ी संख्या में संविदा विद्युतकर्मियों की छंटनी की गई है, जिससे वे बेरोजगार हो गए हैं। ग्रामीण गरीबों को मुफ्त बिजली कनेक्शन देने के बाद भारी भरकम बिल भेजकर शोषण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर के फैसले को शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। खाद की किल्लत को कृत्रिम संकट बताया, किसानों को कालाबाजारी और नकली खाद से परेशान किया जा रहा है। छुट्टा पशुओं की समस्या को गंभीर है। बाढ़ और कटान से प्रभावित क्षेत्रों को राहत देने की मांग की गई है।
पूर्व जिलाध्यक्ष अनुराग पटेल ने कहा कि हर वर्ग की जनता डबल इंजन की सरकारों से त्रस्त हो चुकी है, पीडीए के लोगों का शोषण हो रहा है और उनकी आवाज दबाई जा रही है। धरने को जिला अध्यक्ष रामपाल सिंह यादव, पूर्व एमएलसी शशांक यादव, पूर्व विधायक दाऊद अहमद, राम सरन, आरएस कुशवाहा, विनय तिवारी, डॉ. आरए उस्मानी, सुनील लाला, वरुण चौधरी, क्रांति कुमार सिंह आदि नेताओं ने संबोधित किया। धरने पर बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
भाजपा सरकार में किसान खाद व जनता बिजली कटौती से परेशान
पलियाकलां। सपा के प्रदेश सचिव रेहान खान ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला। प्रदेश सचिव रेहान खान ने कहा कि प्रदेश की जनता खुद का ठगा महसूस कर रही है। किसान खाद के लिए परेशान है और बिजली कटौती से जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। प्राथमिक स्कूलों को बंद कर करीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सपा इन मुद्दों पर संघर्ष कर रही है और समाधान न होने तक आंदोलन भी करेगी। उन्होंने पलिया क्षेत्र में हुए चैनेलाइजेशन कार्य पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 22 करोड़ की लागत से कार्य हुआ, लेकिन एक लाख क्यूसिक पानी छोड़े जाने के बाद ही रेललाइन के नीचे से पानी रिसने लगा। संवाद