कृषक वैज्ञानिक संवाद में विचार रखते डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। किसान फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत शनिवार को जनपद स्तरीय कृषक जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जिसमें डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने किसानों से फसलों के अवशेष को अपने खेत में न जलाने की अपील की। डीएम ने कृषि एवं राजस्व विभाग के कर्मचारियों की टीमों को पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए भ्रमणशील रहने के निर्देश भी दिए।
कलेक्ट्रेट परिसर में लगाई गई कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का डीएम ने फीता काटकर शुभारंभ किया। उप कृषि निदेशक डॉ योगेश प्रताप सिंह ने कहा कि किसान पराली जलाता है, तो उसके विरुद्ध आईपीसी और राष्ट्रीय हरित अधिकरण के प्रावधानों के तहत जुर्माना लगाया जाएगा। घटना की पुनरावृत्ति होने पर एफआईआर दर्ज कराई जाए। फसलों के अवशेष को जलाने वाले दोषी व्यक्तियों की पुष्टि होने पर क्षेत्रफल के हिसाब से जुर्माना तय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 17 साधन सहकारी समिति, 13 गन्ना समिति एवं 21 ग्राम पंचायतों में फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना की गई है। वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ एमके विश्वकर्मा ने जैविक विधि से फसल अवशेष सड़ाने की जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ पीके बिसेन ने फसल अवशेष के अध्ययन के आधार पर बताया कि जिले में गेहूं के फसल अवशेष से 1451 टन नाइट्रोजन, 285 टन फॉस्फोरस और 3936 टन पोटाश प्राप्त किया जा सकता है, जो किसानों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। जनपद में कार्बन की उपलब्धता 0.75 थी, जो अब घटकर 0.20 तक सिमट गई है, जिसका कुप्रभाव मृदा पर पड़ रहा है। कार्यक्रम मेें कृषि वैज्ञानिक डा सुहेल ने केले की खेती के बारे में जानकारी दी। संवाद