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सब्जियों ने बिगाड़ा रसोई का बजट.. थालियों में कम हुईं हरी सब्जियां

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सब्जी मंडी में आलू खरीदते लोग। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। लॉकडाउन में आम आदमी की बेपटरी हुई आर्थिक स्थिति अनलॉक होने के बावजूद अब तक पटरी पर नहीं लौट सकी है। ऐसे में त्योहारों पर सब्जियों के बढ़े दामों ने उनकी मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। त्योहारी सीजन में सब्जियों के दाम आसमान छूने लगे हैं। हरी सब्जियों के अलावा आलू, टमाटर और प्याज आम आदमी की थाली में कम होता जा रहा है। नवरात्र शुरू होने से पहले बाजार में पुराना आलू 30, 35 और नया आलू 40 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था तो वहीं मंगलवार को पुराने आलू के दाम 40, 45 और नए आलू के दाम 50 रुपये प्रति किग्रा रहे।
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भले की अनलॉक को तीन माह बीत रहे हों, लेकिन लॉकडाउन में चौपट हुई लोगों की रोजी रोटी अब तक सही ढंग से पटरी पर नहीं आ सकी है। लॉकडाउन में काम धंधा बंद हो जाने से परेशान गरीबों के लिए अब महंगाई मुंह का निवाला छीनने को आतुर है। आलू एक ऐसी सब्जी है, जिसके बिना थाली सूनी रहती है। अब यह भी आम आदमी से दूर होता जा रहा है। चार दिन पहले 30 से लेकर 40 और 45 रुपये प्रतिकिग्रा बिकने वाला नया पुराना आलू नवरात्र में और महंगा हो गया है। नया आलू जहां 50 रुपये प्रति किग्रा पहुंच गया है तो वहीं पुराना आलू 35 और 40 रुपये प्रति किग्रा तक बिक रहा है। आलू व्यापारियों का कहना है कि नया आलू इस समय प्रयागराज से आ रहा है। वहीं से महंगा मिलता है इसलिए महंगा बिक रहा है।
चार दिनों में सब्जियों के तुलनात्मक दाम (रुपये प्रतिकिलो)
आलू पुराना 40 45
नया 45 50
टमाटर 60 65
मटर 160 170
धनिया 400 410
हरी मिर्च 80 90
नींबू 40 60
अदरक 80 85
खीरा 50 55
लौकी 20 25
कद्दू 25 30
प्याज 40 60
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सब्जियों के दामों पर एक नजर (रुपये प्रतिकिलो)
आलू- पुराना 35 और 40, नया 50 रुपये
टमाटर-50, मटर-160, धनिया-400, हरी मिर्च-80, नींबू-50, अदरक-80, खीरा-50, लौकी-20, कद्दू-25, प्याज- 40 से 60
थोक मूल्य
आलू- 2500 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल (नया और पुराना)
डीजल के दामों की बढ़ोतरी होना भी महंगाई का एक प्रमुख कारण है। डीजल महंगा होने से भाड़ा महंगा हुआ है। पहले हल्द्वानी आलू लाने का भाड़ा जहां 50 रुपये प्रति क्विंटल के करीब लगता था, वह अब बढ़कर 60 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गया है।
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-राजू राना ट्रांसपोर्टर
आढ़ती करते हैं स्टाक
जिले में आलू भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज बने है लेकिन आलू का यहां उत्पादन न होने के भंडारण नहीं हो पाता है इस कारण आढ़ती आलू का स्टाक रखते हैं। आढ़तियों का कहना है कि एक ट्रक आलू मंगाया तो वह मंडी में जब बिक जाता है तभी दूसरा ट्रक मंगवाते हैं। वहीं राजापुर सब्जी मंडी से शहर की मंडी की दूरी होने के कारण भाड़ा बढ़ने का असर भी सब्जियों के दामों पर पड़ता है।
महिलाएं बोलीं-महंगाई ने बिगाड़ा बजट
त्योहारी सीजन में हर चीज महंगी हो गई है। एक तो कोरोना ने लोगों की आमदनी प्रभावित करके रख दी और अब महंगाई ने खाने की थाली पर भी संकट ला दिया है। ऐसी महंगाई में त्योहार भी मनाना मुश्किल होगा
-सीमा
बेतहाशा बढ़ती महंगाई पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए, जिससे आमआदमी दो वक्त की रोटी सुकून से खा सके। इतनी महंगाई में बेचारे गरीब कैसे सब्जी खा पाएंगे। शासन को महंगाई रोकने के लिए कुछ करना चाहिए।
-आरती
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20 एलकेएच 7
गरीब हो या फिर अमीर अधिकतर घरों में लोग नवरात्र व्रत रखते हैं, जिसमें आलू ही प्रमुख रूप से खाया जाता है। मगर, इसकी बढ़ी कीमतों ने व्रत रखने वालों के खाने पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
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-पूजा पांडे
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