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पंचायत घर: कहीं भैंस-बकरी पाली जा रहीं, तो कहीं भरा है भूसा

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बबौना ग्राम पंचायत में जर्जर पड़ा पंचायतघर। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। 754 ग्राम पंचायतों में लाखों की लागत से बनाए गए कई मिनी सचिवालय (पंचायत घर) बिना इस्तेमाल किए ही जर्जर और खराब हो रहे हैं। इनमें कुछ जगह पशु बांधे जा रहे हैं तो कहीं भूसा भरा है। इसके विपरीत सरकार ने शेष बची 412 ग्राम पंचायतों में भी मिनी सचिवालय बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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ग्राम पंचायतों में कामकाज को सुचारु और ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से सचिवालयों का निर्माण कराया गया था। इनमें अधिकतर में ग्राम पंचायतों का दफ्तर संचालित नहीं हो पाया है। इस समय जनपद की 1166 ग्राम पंचायतों में से 754 में मिनीनसचिवालय बने हैं। इसके बाद वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत 15 ग्राम पंचायतों और 2020-21 में 18 ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय बनाए जाने हैं। इसके अलावा शेष 379 ग्राम पंचायतों में भी उपलब्ध ग्राम निधि से मिनी सचिवालयों का निर्माण कराया जा रहा है। इससे जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में मिनी सचिवालय बन जाएंगे, लेकिन इनका उपयोग कब शुरू होगा? इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। प्रधानों और सचिवों ने भी मिनी सचिवालयों में कामकाज शुरू नहीं किया है और न ही ग्राम सभा की बैठकें की जा रही हैं।
बबौना के सचिवालय में बांधे जा रहे जानवर
मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत बबौना में करीब 15 साल पहले सचिवालय बनाया गया था, जिसके बाद से उसका एक बार भी उपयोग नहीं किया गया। लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर स्थित होने के बावजूद प्रधान और सचिव ने इसकी कभी सुध नहीं ली। लावारिस हाल में पड़ा होने के कारण कुछ लोगों ने इस पर कब्जा कर लिया है और इसमें जानवर बांधे जा रहे हैं। भवन के दरवाजों और खिड़कियों के पल्ले भी लोग उखाड़ ले गए हैं। ऐसे ही मितौली ग्राम पंचायत के सचिवालय में शिक्षा विभाग का बीआरसी (ब्लॉक संसाधन केंद्र) संचालित किया जा रहा है।
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जिन ग्राम पंचायतों में सचिवालय जर्जर हो गए हैं, उनके प्रधानों और सचिवों को राज्य वित्त आयोग/14वें वित्त आयोग की निधि से मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। जहां पर कब्जा हो गया है या पशु बांधे जा रहे हैं, उन्हें खाली कराया जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
-मनोज कुमार, एडीपीआरओ
लाखों की लगात से बने सरकारी इमारतों में अराजकतत्वों का डेरा
गोला गोकर्णनाथ। प्रदेश सरकार ने गांव की सूरत बदलने के लिए लाखों, करोड़ों का बजट पानी की तरह बहाया। ग्राम पंचायत स्तर पर करीब 15 लाख की लागत से आलीशान मिनी सचिवालय बनवाए गए, लेकिन यहां कभी भी ग्राम विकास की योजनाओं के निर्धारण के लिए बठकें नहीं हुईं, ऐसे में इन देख रेख के अभाव में यहां अराजक तत्वों ने डेरा जमा लिया। जिन्होंने मुख्य द्वार, खिड़की, दरवाजे, नल, शौचालय, ओवरहेड टैंक तोड़कर तहस-नहस कर दिए। लाखों खपाने के बाद महज 10 वर्षों में ग्राम पंचायतों के यह मिनी सचिवालय खंडहर हो गए।
ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट के मिनी सचिवालय आज तक कोई बैठक नहीं
ब्लॉक बांकेगंज की ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट के मिनी सचिवालय में आज तक कोई बैठक नहीं हुई। इस सचिवालय का निर्माण जिला पंचायत की ओर से पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि से करीब 15 लाख की लागत से कराया गया था। अराजक तत्वों ने इस आलीशान मिनी सचिवालय को तहस-नहस कर दिया है। पंचायत सेक्रेटरी विजेंद्र अवस्थी ने बताया कि अभी चार्ज लिया है। मिनी सचिवालय की वर्तमान स्थिति से वाकिफ नहीं हैं। निरीक्षण कर साफ सफाई और मरम्मत कार्य कराया जाएगा।
बहेड़ा मुल्तान में गिरताऊ हुआ मिनी सचिवालय
ममरी ब्लॉक कुंभी गोला क्षेत्र की ग्राम पंचायत बहेड़ा मुल्तान में पंचायत भवन का कोई पुरसाहाल नहीं है। वर्ष 1998 में निर्मित हुए पंचायत भवन के दरवाजों-खिड़कियों के पल्ले देखरेख के अभाव में गायब हो चुके हैं। छत खुले आसमान की तरह टपक रही है। गांव के राकेश कुमार वर्मा, वीरेंद्र कुमार, मूलचंद, राजेश उर्फ पिंटू आदि का कहना है कि पंचायत सचिव रामपति वर्मा बैठक विद्यालय में बुलाती हैं। उनका कहना है कि भवन बैठने लायक नहीं है। प्रधान प्रमोद कुमार वर्मा का कहना है कि पंचायत भवन को नए सिरे से बनवाने की कई बार मांग अधिकारियों से की जा चुकी है। जिस पर अधिकारी कहते हैं भवन नए सिरे से बनवाने के लिए बजट नहीं है लिंटर टूटने पर मरम्मत कराई जा सकती है।
भीखमपुर में पंचायत भवन का बुरा हाल
भीखमपुर मितौली ब्लॉक, तहसील के कस्बा भीखमपुर में तीन दशक पहले बनाए गए पंचायत भवन में पंचायत संबंधी कामकाज के नाम पर कभी मीटिंग हुई हो ग्रामीणों को तो याद नहीं है। जर्जर अवस्था में पड़ी इमारत में उगी झाड़ियां और भवन के ऊपर छत में दरारें पड़ गई हैं। पड़ोस के अमर शहीद राज नारायण मिश्रा स्मारक विद्यालय द्वारा पंचायत भवन का उपयोग किया जा रहा है। पंचायत भवन में गांव के विकास की बैठकें करना तो दूर अधिकारी वहां जाने से भी कतराते हैं। ग्राम पंचायत भीखमपुर में उप स्वास्थ्य केंद्र, पंचायत भवन और राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल की बिल्डिंग देख रेख के अभाव में बदहाल हैं। ग्राम प्रधान अर्चना पांडे का कहना है कि 35 वर्ष पूर्व उनके चाचा प्रधान श्रीकांत पांडे के कार्यकाल में निर्माण हुआ था, इमारत के जर्जर होने की सूचना और जीर्णोद्धार के लिए अधिकारियों से मांग की गई है।
अहमदनगर में पंचायत घर के पास जाने से भी लगता है डर
कुंभी ब्लॉक की ग्राम पंचायत अहमदनगर में तीन दशक पूर्व बना पंचायत भवन देख रेख के अभाव में जर्जर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती दौर में बैठकें हुईं, लेकिन उसके कुछ वर्षों बाद ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी द्वारा पंचायत भवन की देख रेख में लापरवाही बरती जाने लगी और यह भवन जर्जर होता गया। आज आलम यह है कि इस गिरताऊ पंचायत भवन के पास जाने में भी लोगों को डर लगता है। गांव के विकास में बैठके तो नहीं होतीं लेकिन अराजकतत्व भवन के चबूतरे पर ताश खेलते, चिलम पीते देखे जाते हैं, जिन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं है। वहीं गांव की बैठकें अन्यत्र होती हैं। प्रधान प्रतिनिधि मुकेश गुप्ता का कहना है कि मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। शीघ्र ही पंचायत भवन का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
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