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डलाव घर की जमीन को लेकर पालिका और कॉलेज प्रशासन आमने-सामने

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लखीमपुर खीरी। सब्जी मंडी के डलाव घर की जमीन को लेकर रविवार को पालिका और कॉलेज आमने-सामने सामने आ गया। कोर्ट से फैसला होने के बाद जब कॉलेज प्रशासन ने उस पर निर्माण करना शुरू दिया तो पालिकाध्यक्ष पति उसे रोकने के लिए वहां पर कूड़ा डलवाने पहुंच गए। इस पर पालिका और कॉलेज कर्मचारियों के बीच काफी देर विवाद हुआ। मौके पर पहुंचे सदर एसडीएम ने दोनो पक्षों को कागजात लेकर कार्यालय में आने को कहा और मामला शांत कराया।
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आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के पास एक जमीन पर नगर पालिका ने डलाव घर बना रखा है। इसको लेकर पिछले कई साल से मुकदमा चल रहा था। छह दिसंबर को कोर्ट का फैसला पक्ष में आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने रविवार रात वहां पर दीवार उठवानी शुरू कर दी। इसकी जानकारी लगने पर पालिका कर्मी दो ट्रालियों में कूड़ा लेकर वहां पहुंच गए। मौके पर पहुंचे पालिकाध्यक्ष पति डॉ.सतीश कौशल बाजपेई ने भी कूड़ा डलवाने का असफल प्रयास किया। प्राचार्य की सूचना पर पहुंचे सदर एसडीएम ने दोनो पक्षों को कागजात के साथ कार्यालय आने की बात कहकर मामला शांत कराया। हालांकि इस मामले में पालिकाध्यक्ष निरूपमा बाजपेई का कहना है कि कोर्ट के निर्णय के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
एसडीएम की दो टूक, न बनेगी दीवार और न पड़ेगा कूड़ा
एसडीएम के निर्देशानुसार सोमवार को कॉलेज प्रशासक मुदित दीक्षित और पालिका के जितेेंद्र सिंह और अमित सोनी उनके कार्यालय पहुंचे। मुदित दीक्षित ने जहंा कोर्ट का ऑर्डर दिखाकर जमीन पर अपना हक जताया तो वहीं पालिका के लोगों ने उस क्षेत्र में कूड़ा डलवाने के लिए जगह का न होना बताया। दोनो पक्षों की बात सुनकर एसडीएम ने कॉलेज प्रशासन को निर्माण न कराने और पालिका कर्मियों को कूड़ा न डलवाने की चेतावनी दी।
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डलाव घर की जमीन पालिका की है। निर्माण रोकने के लिए कूड़ा डलवाने गया था। कॉलेज के पास कई साल से कूड़ा पड़ता आ रहा है। जब मंदिर और स्कूल के पास शराब की दुकान खुल सकती है तो कॉलेज के पास कूड़ा डलवाने में क्या बुराई है।
डॉ.सतीश कौशल बाजपेई, पालिकाध्यक्ष पति
दोनो पक्ष दस्तावेज के साथ ऑफिस आए थे। फिलहाल कूड़ा डालने और निर्माण कराने पर रोक लगा दी है। इस मामले में दोनो पक्षों से अलग-अलग वार्ता की जाएगी। इसके बाद ही इसका हल निकालेगा।
डॉ. अरूण कुमार सिंह, एसडीएम सदर
कॉलेज की जमीन पर पालिका पिछले कई साल से कूड़ा डलवा रही थी। जमीन को लेकर कोर्ट में वाद भी चल रहा था। छह दिसंबर को पक्ष में निर्णय आने के बाद रविवार को निर्माण शुरू कराया तो पालिकाध्यक्ष पति गनर पालिका कर्मियों के साथ कूूड़ा डलवाने आ गए। जबकि हाईकोर्ट की ओर से 2014 में ही इस जमीन पर कूड़ा डालने पर रोक लगाई जा चुकी है।
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डॉ. सुरचना त्रिवेदी, प्राचार्य, आर्यकन्या महाविद्यालय
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