बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की धौरहरा रेंज में आतंक का पर्याय बने मादा तेंदुए को दुधवा जंगल में छोड़ दिया गया। रात में दुधवा के घने जंगल में पिंजरे का दरवाजा खुलते ही तेंदुए ने तेज छलांग लगाई और पल भर में ही जंगल में जाकर अफसरों की आंखों से ओझल हो गया। आतंक का पर्याय बना तेंदुआ सोमवार की रात वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद हुआ था।
मालूम हो कि यह मादा तेंदुआ एक माह से 15 गांवों में मचाए हुए थी। पिछले दिनों धौरहरा रेंज के बेेलागढ़ी में टेढ़ीगौढ़ी निवासी राजाराम के सात वर्षीय पुत्र मनोज को यह तेंदुआ गन्ने के खेत में घसीटकर ले गया था और वहां उसे मार डाला था। इसके अलावा भी इसने कई मवेशियों को अपना शिकार बनाया था, जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश था। वन विभाग इस तेंदुए को पकड़ने के लिए कई दिनों से लगा था। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की टीम ने तेंदुए की तलाश शुरू की। नाइट विजन से लैस कैमरे लगाए गए और जगह-जगह पिंजरे रखे गए। सोमवार रात मादा तेंदुआ एक पिंजरे में कैद हो गया। इसका मेडिकल परीक्षण तीन पशु चिकित्सकों के पैनल से कराया गया। जांच में यह बात सामने आई कि तेंदुआ आदमखोर नहीं है। इसलिए यह जंगल में छोड़ने के लिए फिट पाया गया। डीडी ने बताया कि मेडिकल जांच के बाद डब्ल्यूटीआई के डॉक्टर दक्ष, दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्साधिकारी डॉ दयाशंकर की मौजूदगी में तेंदुए को सुरक्षित दुधवा के जंगल में छोड़ दिया गया।