लखीमपुर खीरी। पराली जलाने से वायु प्रदूषण के फैलने का हल्ला है, इसके साथ-साथ जिले में कुकुरमुत्ते की तरह लगे गन्ना कोल्हुओं का धुआं भी हवा को जहरीला बना रहा है। कोल्हुओं की चिमनी मानक के अनुरूप नहीं बनाई गई हैं, जिससे निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण में घुल जाता है। डीएम ने कोल्हुओं से निकल रहे प्रदूषण को कम करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं।
बांकेगंज ब्लॉक के गांव जलालपुर में बीमारियां फैलने का मामला सामने आने के बाद कोल्हु से फैल रहे प्रदूषण की ओर लोगों का ध्यान गया है। गन्ना सीजन में इन कोल्हुओं पर राब और गुड़ बनाया जाता है। सूत्र बताते हैं कि कोल्हुओं की संख्या एक हजार से अधिक है। इन पर किसी विभाग का नियंत्रण न होने से प्रदूषण के मानकों को भी अनदेखा किया जा रहा है। डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि कोल्हु को बंद नहीं कराया जा सकता, क्योंकि इनके माध्यम से हजारों लोगों की रोजी-रोटी चलती है। इनमें प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए जरूरी उपाय करने के लिए कहा है।
जब हम सांस लेते हैं तो हवा में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कण शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे शरीर में तमाम प्रकार की बीमारियां होने का खतरा रहता है। हवा में मौजूद जहरीले कण शरीर में जाकर दिल, फेफड़े और मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर, दिल का दौरा, सांस की तकलीफ, खांसी, आंखों में जलन एवं एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉ. राजकुमार, फिजीशियन, जिला अस्पताल