बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में इस पर्यटन सत्र में भी सैलानियों को बाघों की साइटिंग सबसे ज्यादा हो रही है। यही कारण है कि दुधवा आने वाले टूरिस्ट किशनपुर जरूर जाना चाहते हैं। पर्यटन-सत्र की शुरुआत के अगले दिन ही यहां पांच शावकों समेत एक बाघिन दिखाई पड़ी थी। इसके बाद से टूरिस्टों की दिलचस्पी किशनपुर सेंक्चुरी की तरफ ज्यादा बढ़ गई है। हालांकि शावकों की सुरक्षा के मद्देनजर पार्क प्रशासन ने कुछ रास्तों पर भ्रमण की रोक लगा दी है।
दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में पिछले साल भी बाघों की सबसे ज्यादा साइटिंग हुई थी। इस बार भी यह सिलसिला जारी है। पार्क के अधिकारियों का अनुमान है कि किशनपुर सेंक्चुरी में बाघों की संख्या में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है। यहां के वेटलैंड, ग्रासलैंड और उडलैंड बाघों को बेहतर प्राकृतवास उपलब्ध करा रहे हैं। बांकेगंज कस्बा से किशनपुर सेंक्चुरी भ्रमण करने गए विनोद गोयल, हरीकिशन गोयल, रमेश गोयल, जय, गुनगुन आदि ने बताया कि किशनपुर सेंक्चुरी का प्राकृतिक सौंदर्य भी अपने पूरे निखार पर है। झादीताल के आसपास बाघों का दिख जाना आम बात है। खूबसूरत झादीताल के किनारे कुलाचे भरते हुए बारासिंगा आदि हिरनों और बाघों की दहाड़ के बीच रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों का कलरव मंदिर की घंटियों की धुन सा वातावरण पेश करता है। इसके अलावा जंगल के बाहरी किनारों पर तेंदुओं की चहलकदमी देख लोग रोमांचित हो उठते हैं।
बाघ के दीदार को मशहूर है 23 और 17 नंबर रोड
बाघ देखने की हसरत में सैलानी किशनपुर सेंक्चुरी भ्रमण के लिए जरूर पहुंचते हैं। सैलानी कटैया गेट से किशनपुर सेंक्चुरी के हरे-भरे और घने जंगल के प्राकृतिक नजारे का आनंद लेते हैं। टाइगर साइट के लिए किशनपुर सेंक्चुरी की 23 और 17 नंबर रोड प्रसिद्ध है। जानकार सैलानी भ्रमण के लिए गाइडों को इसी रोड पर ले जाने की जिद करते हैं।
किशनपुर सेंक्चुरी में भ्रमण रास्तों पर बाघिन के साथ पांच शावकों को देखे जाने के बाद शावकों की सुरक्षा के मद्देनजर कुछ रास्तों को सैलानियों के भ्रमण के लिए बंद कर दिया गया है। यहां आने वाले टूरिस्टों के लिए अन्य भ्रमण रास्ते खुले हुए हैं।
- तौफीक अहमद, वन्यजीव प्रतिपालक, दुधवा टाइगर रिजर्व, किशनपुर सेंक्चुरी।