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Lakhimpur Kheri News: नगर निकायों के अध्यक्षों को चाहिए गाड़ी और सांसद-विधायक की तरह प्रोटोकॉल

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लखीमपुर खीरी। नगर निकायों की माली हालत सुधारने से ज्यादा निकायों के अध्यक्ष अपनी सुविधाएं बढ़ाने की मांग को लेकर मुखर हो रहे हैं। उन्होंने सांसद-विधायकों जैसी सुविधाएं देने की मांग उठानी शुरू कर दी है। अध्यक्षों को गाड़ी और गनर चाहिए। जिलाधिकारी, एसएसपी समेत जिले के अन्य प्रशासनिक अफसरों से मिलने के दौरान प्रोटोकॉल भी विधायक-सांसद जैसा चाहिए।
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गोला गोकर्णनाथ में हाल ही में हुई स्थानीय निकाय अध्यक्ष परिषद की महत्वपूर्ण बैठक में उपरोक्त मांगों को उठाने की सहमति बनने के बाद मांगपत्र तैयार किया गया है। जल्द ही मांगों को लेकर स्थानीय निकाय अध्यक्ष परिषद का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा।
14 सूत्रीय मांगपत्र में कहा गया है कि स्थानीय निकाय को दी जाने वाली शिष्टाचार धनराशि 15 हजार रुपये है, जो काफी कम है। इसे बढ़ाकर नगर पालिकाओं के लिए करीब 80 हजार और नगर पंचायतों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिमाह की जाए। साथ ही 80 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय भी दिया जाए।
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निकाय अध्यक्षों का कहना है कि सांसद, विधायकों को टोलटैक्स की सुविधा फ्री दी जाती है, लेकिन निकाय अध्यक्षों को इस सुविधा से वंचित रखा गया है। ऐसे में अध्यक्षों को पूरे प्रदेश में टोल टैक्स की निशुल्क सुविधा दी जाए। इतना ही नहीं स्थानीय निकाय को दिए जाने वाले 15वें राज्यवित्त में जिला प्रशासन की भूमिका समाप्त की जाए।
इसमें जिला प्रशासन का हस्तक्षेप होने से काफी दिक्कतें आती हैं। जबकि नगर निकाय खुद में एक सदन हैं, जिसको पूरे अधिकार दिए जाएं। स्थानीय निकाय अध्यक्षगणों को सचिवालय में प्रवेश के लिए स्थायी पास (1+1 सहयोगी) की व्यवस्था की जाए।

अध्यक्षों को भी दी जाए सुरक्षा
विधायक-सांसदों को सुरक्षा दी जाती है, लेकिन नगर पालिका व नगर पंचायत के अध्यक्षों को सुरक्षा नहीं मिलती है। जबकि वह भी जनप्रतिनिधि हैं। उनको भी सुरक्षा के लिए गनर दिया जाए। प्रत्येक स्थानीय निकाय के लिए एक उप निरीक्षक व दो आरक्षियों को निकाय में शांतिपूर्ण व्यवस्था के लिए नियमित तौर से संबद्ध किया जाए।

ईओ को एक निकाय से ज्यादा की न दी जाए जिम्मेदारी
निकाय अध्यक्षों ने प्रत्येक नगर निकाय में अधिशासी अधिकारी और जेई की स्थायी नियुक्ति की मांग भी उठाई है। अधिशासी अधिकारियों के कर्मचारी उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर अनिवार्य करने की मांग की। साथ ही किसी भी अधिशासी अधिकारी को एक निकाय से ज्यादा की जिम्मेदारी न देने की मांग की है। पिछले कई साल से निकायों में ईओ की नियुक्ति नहीं है। एक ईओ के पास दो से तीन-तीन निकायों की जिम्मेदारी है, जिसकी वजह से काफी दिक्कतें होती हैं। साथ ही निकाय बोर्ड को अधिशासी अधिकारी के विरुद्ध निकाय एक्ट की धारा-58 के तहत कार्रवाई का अधिकार दिया जाए।
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आचार संहिता समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से समय लेकर इस संबंध में वार्ता की जाएगी।

डॉ. इरा श्रीवास्तव, स्थानीय निकाय अध्यक्ष परिषद की प्रदेश अध्यक्ष
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