पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार जिले के किसानों के साथ छलावा कर रही है। प्रदेश सरकार ने 50 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है लेकिन खीरी और सीतापुर जिले के किसान सूखा पीड़ित नजर नहीं आए। उन्होंने कहा कि यहां किसानों की स्थिति बेहद खराब है। किसान अपने परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पा रहे हैं।
इस संबंध में जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में जितिन ने कहा है कि किसानों की समस्या केंद्र और प्रदेश सरकार की सत्ता में बैठे लोगों को नहीं दिखाई दे रही है जिस कारण उन्होंने जिला खीरी और सीतापुर को सूखाग्रस्त न घोषित करके किसानों के साथ अन्याय किया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पहले से ही यहां के किसान अतिवृष्टि और ओलावृष्टि जैसी दैवीय आपदा में अपनी फसलें गवां चुके हैं। इसके मुआवजे में केंद्र और प्रदेश सरकार ने कुछ चुनिंदा लोगों को मुआवजा देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। जबकि यहां के वास्तविक किसान सिर्फ आहें भरकर ही रह गए। उन्हें मुआवजे के नाम पर तहसील और जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें कुछ हासिल नही हुआ।
उन्होंने कहा कि किसान केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा था कि शायद यह सरकारें यहां के किसानों की समस्याओं को समझें और उनके घावों पर कुछ मरहम भेजें।
इसके उलट प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 50 जिलों को सूखा ग्रस्त घोषित किया लेकिन उस सूची में प्रदेश सरकार को जिला खीरी और सीतापुर को सूखा ग्रस्त नही घोषित किया है। जबकि यहां पर सूखा पड़ने से किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गयी हैं।
पूर्वमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि चुनाव के समय किसानों के सबसे ज्यादा हितैषी बनने वाले सत्तासीन लखनऊ और दिल्ली में बैठे नेताओं को अब यहां के किसानों की कोई सुधि नही है। प्रदेश और केंद्र सरकार ने यदि शीघ्र ही खीरी और सीतापुर जिलों को सूखा ग्रस्त घोषित नहीं किया तो कांग्रेस पार्टी किसानों के हितों के लिए संघर्ष करेगी और उन्हें न्याय दिलाएगी।